नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के संस्मरण (Memoir) के कुछ अंश पढ़ने का प्रयास किया। सत्ता पक्ष के तीव्र विरोध और रक्षा मंत्री Rajnath Singh व गृह मंत्री Amit Shah की आपत्तियों के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 'नियम 349' का हवाला देते हुए राहुल गांधी को टोक दिया। इस विवाद के कारण सदन की कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा। राहुल गांधी चीन सीमा विवाद और सैन्य नेतृत्व पर पूर्व सेना प्रमुख के कथित दावों को सदन के पटल पर रखना चाहते थे, जिसे आसन ने संसदीय मर्यादा के विरुद्ध बताया।
दरअसल, Rule 349 of Lok Sabha सदन के भीतर सांसदों के आचरण और शिष्टाचार (Etiquette) को निर्धारित करता है। इस नियम की उपधारा (i) स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई भी सदस्य सदन की कार्यवाही के दौरान किसी समाचार पत्र, पत्रिका या पुस्तक के अंश तब तक नहीं पढ़ सकता, जब तक कि वह सदन के आधिकारिक कामकाज से सीधे तौर पर संबंधित न हो। इसके अलावा, यह नियम सदस्यों को सदन में नारे लगाने, तख्तियां दिखाने, अन्य सदस्यों के भाषण में बाधा डालने और बिना अनुमति के दस्तावेज उद्धृत करने से रोकता है।
सदन में गतिरोध तब और बढ़ गया जब गृह मंत्री अमित शाह ने सवाल उठाया कि क्या वह पुस्तक जिसे राहुल गांधी उद्धृत कर रहे हैं, वास्तव में प्रकाशित हुई है या वह केवल एक मसौदा है। स्पीकर Om Birla ने बार-बार अपील की कि नेता प्रतिपक्ष राष्ट्रपति के अभिभाषण पर केंद्रित रहें और सदन की नियम पुस्तिका का उल्लंघन न करें। उन्होंने कहा कि आसन के निर्देशों की अवहेलना करना 'अवमानना' की श्रेणी में आता है। दूसरी ओर, राहुल गांधी का तर्क था कि चूंकि भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल उठाए हैं, इसलिए उन्हें सेना से जुड़े तथ्यों को रखने का पूरा अधिकार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Parliamentary Rules के तहत किसी भी बाहरी सामग्री को रिकॉर्ड पर लाने के लिए पहले उसे प्रमाणित (Authenticate) करना अनिवार्य होता है। नियम 349 का उद्देश्य सदन की गरिमा को बनाए रखना और इसे बाहरी प्रचार का मंच बनने से रोकना है। इस हंगामे के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विपक्ष के नेता को संवेदनशील रक्षा मुद्दों पर बोलने के लिए प्रक्रियात्मक छूट दी जानी चाहिए या नियमों का पालन सबके लिए समान है।