नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के गलियारों में विपक्षी एकजुटता और 'INDIA' गठबंधन के नेतृत्व को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पूर्व मीडिया सलाहकार Sanjaya Baru ने एक कद्दावर तर्क देते हुए ममता बनर्जी का नाम गठबंधन के नेता के रूप में आगे बढ़ाया है। उन्होंने तर्क दिया है कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में ममता बनर्जी एकमात्र ऐसी नेता हैं जो एक साथ राजनीतिक दल और सरकार दोनों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। बारू के अनुसार, विपक्षी खेमे में ममता की छवि एक 'सेल्फ-मेड' और पहली पीढ़ी की लोकप्रिय नेता के रूप में है, जो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अन्य क्षेत्रीय नेताओं से अलग खड़ा करती है।
संजय बारू ने अपने लेख में कांग्रेस की वर्तमान रणनीति पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी-मनमोहन सिंह के पुराने मॉडल को Rahul Gandhi और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ दोहराने से विपक्षी गठबंधन को भाजपा के खिलाफ कोई खास लाभ नहीं मिला है। बारू का मानना है कि अब समय आ गया है जब गठबंधन का नेतृत्व एक महिला के हाथ में होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि भाजपा को 'पुरुष प्रधान पार्टी' के रूप में पेश करते हुए, एक स्वतंत्र महिला छवि वाली नेता (ममता बनर्जी) भाजपा के महिला वोट बैंक में सेंध लगा सकती हैं।
सियासी हलकों में प्रतिक्रियाएं
TMC का समर्थन: तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद Sagarika Ghose ने इस विचार का जोरदार समर्थन किया है। उन्होंने बारू के लेख को साझा करते हुए इसे "एक ऐसा विचार जिसका समय आ गया है" करार दिया। टीएमसी नेताओं का मानना है कि ममता का जमीनी संघर्ष उन्हें पीएम मोदी के सामने एक ठोस विकल्प बनाता है।
कांग्रेस की स्थिति: भले ही ममता का नाम चर्चा में है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का आधार अभी भी अन्य क्षेत्रीय दलों की तुलना में व्यापक है। राहुल गांधी एक मजबूत राष्ट्रीय चेहरा बने हुए हैं, जबकि ममता की शक्ति मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल तक सीमित मानी जाती है।
महिला सशक्तिकरण का मुद्दा: बारू ने याद दिलाया कि इंदिरा गांधी के बाद देश को एक महिला प्रधानमंत्री की आवश्यकता है, और ममता बनर्जी इस पद के लिए सभी योग्यताएं रखती हैं।
आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्ष के भीतर नेतृत्व की यह खींचतान गठबंधन की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती है। जहाँ एक ओर ममता बनर्जी की स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अपने 'बड़े भाई' की भूमिका को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही है। अब देखना यह होगा कि क्या INDIA Alliance के अन्य घटक दल इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताते हैं या विपक्ष इसी बिखराव के साथ आगे बढ़ेगा।