नई दिल्ली/बेंगलुरु: रक्षा क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को एक ऐतिहासिक घोषणा की। बेंगलुरु स्थित Gas Turbine Research Establishment (GTRE) में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब एयरो-इंजन के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। रक्षामंत्री ने स्पष्ट किया कि जो तकनीक विकसित करने में अन्य देशों को 20 से 25 साल लगते हैं, भारत उसे अगले 5 साल में हासिल करने का लक्ष्य रख रहा है। उन्होंने विशेषज्ञों से कहा, "रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए मानकर चलिए कि आपके पास केवल 5 साल बचे हैं, और हमें इसी समय सीमा में सर्वश्रेष्ठ परिणाम देने हैं।"
रक्षामंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत अब केवल 5वीं पीढ़ी के इंजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 6th Generation Technology पर शोध अभी से शुरू करना समय की मांग है। उन्होंने बताया कि भारत, National Aero Engine Mission के तहत फ्रांस और ब्रिटेन (UK) के साथ संयुक्त अध्ययन और तकनीक साझा करने पर काम कर रहा है। यह सहयोग न केवल नई तकनीक सीखने में मदद करेगा, बल्कि दशकों पुरानी चुनौतियों को सुलझाने में भी सहायक सिद्ध होगा।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्वीकार्यता
स्वदेशी ताकत का प्रदर्शन: राजनाथ सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे स्वदेशी संचार प्रणाली और हथियारों ने सेना का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और Machine Learning के इस दौर में स्वदेशी तकनीक ही भारत की असली सुरक्षा गारंटी है।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता: उन्होंने 18 वर्षों से लंबित India-EU Free Trade Agreement के पूरा होने को भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक शक्ति की स्वीकार्यता बताया।
वैश्विक सुपरपावर के रूप में उदय: रक्षामंत्री ने साझा किया कि ग्रीस के रक्षामंत्री ने भारत को अब एक 'उभरती शक्ति' के बजाय एक 'वैश्विक सुपरपावर' और लीडर के रूप में स्वीकार किया है।
रक्षामंत्री के इस बयान से स्पष्ट है कि भारत अब एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में Self-Reliance (आत्मनिर्भरता) को प्राथमिकता दे रहा है। Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) प्रोजेक्ट के लिए इंजन का स्वदेशी विकास भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा जिनके पास अपनी इंजन तकनीक है। सरकार का लक्ष्य रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ अपनी वायुसेना को दुनिया के सबसे आधुनिक और शक्तिशाली इंजनों से लैस करना है।