लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बजट 2026-27 के माध्यम से प्रदेश को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। Uttar Pradesh Budget में काशी, अयोध्या और प्रयागराज की सफलता को देखते हुए अब नैमिषारण्य, चित्रकूट, विंध्यवासिनी धाम और देवीपाटन जैसे पौराणिक स्थलों के कायाकल्प के लिए विशेष धनराशि आवंटित की गई है। सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा विकसित करना है, जिससे न केवल श्रद्धालुओं को सुगमता होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों नए अवसर भी सृजित होंगे।
सीतापुर स्थित 88 हजार ऋषियों की तपोभूमि नैमिषारण्य (Naimisharanya) के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यहाँ वर्तमान में चल रही 38 विकास परियोजनाओं को गति दी जाएगी, जिसमें चक्रतीर्थ के घाटों का सौंदर्यीकरण और मार्गों का चौड़ीकरण प्रमुख है। इसी तरह, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट धाम के लिए 50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे कामदगिरि परिक्रमा मार्ग और मंदाकिनी नदी के घाटों को भव्य रूप दिया जाएगा।
मिर्जापुर के विंध्यवासिनी धाम (Vindhyavasini Dham) के लिए बजट में कुल 300 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है। इसमें 100 करोड़ रुपये सामान्य बुनियादी ढांचे के लिए और 200 करोड़ रुपये मां अष्टभुजा, कालीखोह और विंध्यवासिनी मंदिर को जोड़ने वाले 'त्रिकोणीय परिक्रमा मार्ग' के निर्माण के लिए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा, बलरामपुर के देवीपाटन के लिए 40 करोड़, हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर के लिए 25 करोड़ और मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ के लिए 15 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जिससे इन प्राचीन तीर्थों की खोई हुई गरिमा वापस लौटेगी।
धार्मिक विशेषज्ञों और प्रोफेसर शिरीष मिश्रा के अनुसार, यह निवेश उत्तर प्रदेश की Tourism Based Economy को एक नई दिशा प्रदान करेगा। सरकार ने अन्य प्राचीन संरक्षित मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए भी 100 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से यूपी न केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र बनेगा, बल्कि 'वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी पर्यटन क्षेत्र की भूमिका निर्णायक होगी। श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, लाइटिंग और डिजिटल साइनेज जैसी आधुनिक सुविधाएं इन परियोजनाओं का मुख्य हिस्सा हैं।