लेह (लद्दाख): लद्दाख की पुगा वैली (Puga Valley) में देश के पहले जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट (भू-तापीय ऊर्जा परियोजना) को लेकर एक बेहद ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण कामयाबी हासिल हुई है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शुक्रवार को 14,000 फीट की बेमिसाल ऊंचाई पर स्थित देश के सबसे गहरे जियोथर्मल कुओं को कमीशन कर राष्ट्र को समर्पित किया। यह भारत के क्लीन एनर्जी मिशन और नेट-जीरो सफर की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) एनर्जी सेंटर द्वारा संचालित यह अभी 1 मेगावॉट (MW) का एक पायलट प्रोजेक्ट है, जिसे आने वाले समय में कमर्शियल लेवल पर बड़े पैमाने पर विस्तारित किया जाएगा।
पुगा वैली को भारत में भू-तापीय ऊर्जा का सबसे सक्रिय हॉटस्पॉट माना जाता है, जहाँ जमीन के काफी करीब भारी मात्रा में गर्म पानी और भाप मौजूद है। इंजीनियर्स के मुताबिक, यहां मात्र 400 मीटर की गहराई पर ही 135 डिग्री सेल्सियस का अधिकतम तापमान रिकॉर्ड किया गया है, जबकि 1,000 मीटर की गहराई पर इससे भी कहीं अधिक तापमान मिलने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट के तहत पहला कुआं 22 मई 2026 को और दूसरा कुआं रिकॉर्ड समय में 8 जुलाई 2026 को पूरा कर लिया गया। लद्दाख जैसी दुर्गम जगह पर ऑक्सीजन की भारी कमी, जमा देने वाली ठंड और खतरनाक रास्तों के बीच भारी ड्रिलिंग मशीनों से काम करना ओएनजीसी की टीम के लिए एक असाधारण इंजीनियरिंग सफलता है।
यह ऐतिहासिक प्रोजेक्ट लद्दाख प्रशासन, लद्दाख ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) लेह और ओएनजीसी के बीच एक एमओयू (MoU) के खत्म होने के कारण कुछ महीनों के लिए अटक गया था। इसके बाद एलजी वीके सक्सेना ने तुरंत दखल देकर इस समझौते को अगले 5 साल के लिए रिन्यू करवाया, जिसके बाद काम ने दोबारा रफ्तार पकड़ी। यह प्रोजेक्ट लद्दाख को पूरी तरह से कार्बन-न्यूट्रल रीजन बनाने में सबसे मददगार साबित होगा, क्योंकि सर्दियों में जब तापमान माइनस 20 से 30 डिग्री तक गिर जाता है, तब यह चौबीसों घंटे चालू रहने वाली बिजली स्पेस हीटिंग और ग्रीनहाउस फार्मिंग के जरिए स्थानीय लोगों को ताजी सब्जियां उगाने और घरों को गर्म रखने की बेहतरीन सुविधा देगी।