सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पर हाईकोर्ट सख्त: पंजाब सरकार को निर्देश जनहित में जरूरत पड़े तो तुरंत लागू करें ESMA


चंडीगढ़: पंजाब के विभिन्न नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में सफाई कर्मचारियों की चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। लगातार हो रही मानसूनी बारिश के बीच प्रदेश के शहरी इलाकों में चरमराई सफाई व्यवस्था और जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों पर चिंता जताते हुए अदालत ने राज्य सरकार को आपातकालीन कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस पंकज जैन की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब सरकार को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक हो, तो सरकार ESMA (आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम) के कड़े प्रावधान लागू करने की संभावना तलाशे।

अदालत ने प्रदीप कुमार, सनीत ग्रेवाल और जसविंदर सेखों द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष प्रभावित क्षेत्रों में फैली गंदगी और जलभराव की तस्वीरें पेश करते हुए आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय विभाग समय रहते वैकल्पिक सफाई व्यवस्था करने में पूरी तरह विफल रहा है। मानसून के मौसम में सीवरेज जाम होने और कचरा सड़ने के कारण डेंगू, मलेरिया जैसी घातक मच्छरजनित व जलजनित बीमारियों के महामारी का रूप लेने का खतरा पैदा हो गया है। इस पर कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि जनता के स्वास्थ्य को किसी भी कीमत पर दांव पर नहीं लगाया जा सकता।

सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों ने अदालत को आश्वस्त किया कि सफाई कर्मचारियों और संबंधित पक्षों के साथ वार्ता कर हड़ताल को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कराने के प्रयास लगातार जारी हैं। सरकार ने इस पूरे संकट से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी देने के लिए अदालत से दो दिनों का समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने 20 जुलाई 2026 तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) दाखिल करने का अंतिम निर्देश दिया है। अब आगामी 20 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट और वैकल्पिक व्यवस्थाओं की समीक्षा के आधार पर ही माननीय न्यायालय आगे की बड़ी कार्रवाई तय करेगा।


Previous Post Next Post