नई दिल्ली: 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना यूबीटी) के छह बागी सांसदों के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी इस हरी झंडी के बाद अब संसद के निचले सदन में शिंदे गुट के सांसदों की कुल संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जबकि उद्धव खेमे में अब महज 3 सांसद ही शेष रह गए हैं। इसके अतिरिक्त, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसद जो हाल ही में एनसीपीआई (NCPI) में शामिल हुए हैं, उन्हें भी सदन में अलग बैठने की अनुमति दे दी गई है।
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने तीखी और आक्रोशित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लोकसभा स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, "साल 2022 से ही हमारी पार्टी को अवैध तरीके से तोड़ा जा रहा है। हमारा नाम और चुनाव चिन्ह तक छीन लिया गया। अब साल 2026 में एक बार फिर हमारी पार्टी के छह सांसदों को चुराकर शिंदे गुट का हिस्सा बता दिया गया। लोकसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों की दलीलें सुने बिना ही यह एकतरफा फैसला दे दिया, जो दिखाता है कि देश में लोकतंत्र लगातार कमजोर हो रहा है।" गौरतलब है कि पिछले महीने ही एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ को अंजाम दिया था, जिसके तहत यूबीटी में यह बड़ी फूट पड़ी।
विभाजन के बाद संसद के भीतर और बाहर दोनों गुटों के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। शिंदे गुट में शामिल होने वाले 6 सांसदों में ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली), संजय जाधव (परभणी), संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व) शामिल हैं। अब उद्धव खेमे के पास केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजभाऊ वाजे ही बचे हैं। इस बदले हुए सियासी समीकरण के बीच शुरू हो रहे Monsoon Session में एनडीए (NDA) सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की पुरजोर कोशिश करेगी। दूसरी ओर, विपक्ष एकजुट होकर सरकार को नीट पेपर लीक, महंगाई और अयोध्या राम मंदिर से जुड़े विवादों पर घेरने के लिए पूरी तरह तैयार है।