'कोर्ट में दी गवाही तो पूरा परिवार साफ कर देंगे', धमकियों से बेखौफ रहकर न्याय की लड़ाई जीतने वाली पूजा पाल का सफर



कौशांबी / प्रयागराज: राजनीति में कई ऐसे चेहरे हैं, जो विरासत से नहीं बल्कि अपने संघर्ष के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं। पूजा पाल भी उन्हीं चुनिंदा और निडर नेताओं में से एक हैं। उनकी कहानी उस साहसी महिला की कहानी है, जिसने अपनी शादी के महज नौ दिन बाद पति को खो दिया, माफिया के खौफनाक आतंक के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जान से मारने की धमकियों का सामना किया, तीन बार विधानसभा पहुंचीं और अब उत्तर प्रदेश भाजपा (UP BJP) के उपाध्यक्ष के पद तक का सफर तय किया। पूजा पाल का नाम उत्तर प्रदेश की उन महिला नेताओं में शुमार है, जिनकी पहचान सत्ता से ज्यादा उनके संघर्ष, साहस और न्याय की लंबी लड़ाई से जुड़ी हुई है।

वर्तमान में पूजा पाल कौशांबी की चायल विधानसभा सीट (Chail Assembly Constituency) से विधायक हैं। उनका राजनीतिक सफर उस जघन्य घटना के बाद शुरू हुआ, जिसने उनकी पूरी जिंदगी को बदल कर रख दिया था। उनके पति और प्रयागराज पश्चिमी सीट से बसपा (BSP) विधायक राजू पाल की 25 जनवरी 2005 को प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके गुर्गों ने सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी थी। उस वक्त पूजा पाल और राजू पाल की शादी के महज 9 दिन ही हुए थे। अतीक अहमद के आतंक ने उनकी हंसती-खेलती जिंदगी पर ऐसा ग्रहण लगाया कि एक सामान्य गृहिणी को अचानक संघर्ष की कठिन राह पर उतरना पड़ा।

पहले चुनाव में मिली हार, लेकिन अतीक के खौफ के आगे नहीं मानी हार

राजू पाल की हत्या राजनीतिक व चुनावी रंजिश का परिणाम मानी गई थी। उस समय तक पूजा पाल को राजनीति का ककहरा तक नहीं पता था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें राजनीति के मैदान में उतरने पर मजबूर कर दिया। राजू पाल की हत्या के बाद प्रयागराज पश्चिमी सीट पर हुए उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने पूजा पाल को अपना प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में एक तरफ पति की हत्या के बाद न्याय मांगने उतरीं पूजा पाल थीं, तो दूसरी ओर अतीक अहमद का भाई अशरफ था। अतीक के दबदबे के कारण पूजा पाल पहला चुनाव हार गईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने एक बार फिर पूजा पाल पर भरोसा जताया और इस बार उन्होंने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसी के साथ वे पहली बार विधानसभा पहुंचीं। इसके बाद 2012 के चुनाव में उन्होंने दोबारा जीत हासिल की, जहां उनके सामने खुद माफिया अतीक अहमद मैदान में था, जिसे हार का मुंह देखना पड़ा। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कौशांबी की चायल सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर तीसरी बार विधायक बनीं।

'कोर्ट में गवाही दी तो पूरा परिवार खत्म कर देंगे', धमकियों के बाद भी लड़ीं कानूनी लड़ाई

दल कोई भी रहा हो, लेकिन पति के हत्यारों को सजा दिलाने की पूजा पाल की लड़ाई कभी कमजोर नहीं हुई। अतीक अहमद जैसे माफिया के आतंक का सामना करना बेहद खतरनाक था। जब सीबीआई ने लखनऊ की सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, तो पूजा पाल पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जाने लगा। पूजा पाल ने सार्वजनिक रूप से बताया था कि सितंबर 2019 से उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही थीं कि यदि उन्होंने कोर्ट में गवाही दी तो उन्हें और उनके पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा।

तमाम धमकियों के बावजूद वे झुकी नहीं और आखिरकार 29 मार्च 2024 को लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत (CBI Court) ने सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ फैसला आने से पहले ही मारे जा चुके थे।

योगी सरकार की तारीफ करने पर सपा से निष्कासन, अब भाजपा में मिली बड़ी जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा अतीक अहमद के माफिया राज और अपराध के खिलाफ चलाई गई 'जीरो टॉलरेंस नीति' (Zero Tolerance Policy) की पूजा पाल ने खुलकर सराहना की थी। उन्होंने अपने पति को न्याय मिलने पर सीएम योगी आदित्यनाथ का सार्वजनिक रूप से आभार जताया था। हालांकि, योगी सरकार की यह सार्वजनिक प्रशंसा समाजवादी पार्टी को रास नहीं आई और सपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।

इसके बाद पूजा पाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गईं। भाजपा ने अब उनके संघर्ष और राजनीतिक कद को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश भाजपा का उपाध्यक्ष (UP BJP Vice President) नियुक्त किया है। एक साधारण गृहिणी से तीन बार विधायक बनने और भाजपा उपाध्यक्ष पद तक पहुंचने का पूजा पाल का यह सफर साबित करता है कि संकल्प और साहस के आगे बड़ी से बड़ी चुनौती भी हार मान लेती है।


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