वाशिंगटन / तेहरान: अमेरिका ने जॉर्डन में अपने सैनिकों की मौत के बाद ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और अधिक तेज कर दिया है। अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के कई रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले (Airstrikes) किए हैं। वाशिंगटन का कहना है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए कायरतापूर्ण हमले का तत्काल जवाब देना और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल आपूर्ति बाधित करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है। इस जवाबी कार्रवाई के बाद पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध का तनाव चरम पर पहुंच गया है।
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, हाल ही में जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी, जबकि एक सैनिक लापता है और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। अमेरिका ने इस आत्मघाती हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान के शक्तिशाली अर्द्धसैनिक संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को जिम्मेदार ठहराया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास सिरिक इलाके में तड़के बमबारी
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, रविवार तड़के करीब 1:30 बजे दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत के सिरिक इलाके को अमेरिकी लड़ाकू विमानों द्वारा निशाना बनाया गया। यह क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। पेंटागन का दावा है कि इन लक्षित हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं और रडार प्रणालियों को नष्ट करना है, जिनके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में तेल टैंकरों की आवाजाही को प्रभावित या बंधक बना सकता है। सेंटकॉम के आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 16 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 430 से अधिक सैनिक घायल हुए हैं। हालांकि, जॉर्डन में मारे गए दो सैनिकों की सटीक पहचान सुरक्षा कारणों से अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई की चेतावनी, खाड़ी देशों ने की निंदा
इस भीषण अमेरिकी हमले से कुछ समय पहले ही ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने वाशिंगटन को कड़ी चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिका ने हमले बंद नहीं किए, तो उसे ऐसा करारा जवाब मिलेगा जिसे वह इतिहास में कभी नहीं भूल पाएगा। वहीं, तेहरान के एक वरिष्ठ वार्ताकार ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान अब अमेरिका के साथ हुए अंतरिम परमाणु या सुरक्षा समझौते के तहत अपनी किसी भी प्रतिबद्धता का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है। दूसरी ओर, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव जासेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने नागरिक ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए इन हमलों को लेकर ईरान की सख्त आलोचना की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है।
इसी बीच, पड़ोसी देश इराक के इरबिल के पास स्थित कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी (Kurdistan Freedom Party) के एक ठिकाने पर भी अज्ञात ड्रोन से हमला किया गया, जिसमें संगठन के आठ सदस्य घायल हो गए। इरबिल में रविवार सुबह स्थानीय लोगों ने कई जोरदार विस्फोटों और हवाई रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) की सक्रियता की आवाजें सुनीं। पिछले चार दिनों में इस स्वायत्त क्षेत्र पर कई ड्रोन हमले हो चुके हैं, जिनकी जांच जारी है।