इस्लामाबाद: पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर अपने बयानों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर की शादी के रिसेप्शन के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान का जन्म इस्लाम के नाम पर हुआ था और आज वह उस ऐतिहासिक मुकाम पर है जहाँ वह अपने उस 'मकसद' को हासिल कर सकता है जिसके लिए इसकी स्थापना की गई थी। In his cryptic remarks, Munir suggested that Pakistan's global and economic stature has significantly strengthened, making it a pivotal leader in the Islamic world. उल्लेखनीय है कि इस अवसर पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सहित देश का पूरा शीर्ष नागरिक और सैन्य नेतृत्व मौजूद था।
मुनीर के इस बयान को हालिया भू-राजनीतिक बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है, विशेष रूप से सऊदी अरब और तुर्की के साथ हुए रक्षा समझौतों और पाकिस्तान के प्रस्तावित 'इस्लामिक नाटो' के विजन को लेकर। Analysts believe his confidence stems from Pakistan's growing diplomatic proximity to the Trump administration, where Munir has been described as a "soldier-diplomat" and even invited to join global peace initiatives like the Gaza Board of Peace. मुनीर ने यह भी संकेत दिया कि पाकिस्तान अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए केवल पश्चिम पर निर्भर नहीं है, बल्कि एक स्वतंत्र इस्लामिक शक्ति के रूप में उभर रहा है जो अपने धार्मिक और रणनीतिक लक्ष्यों को एक साथ लेकर चल सकता है।
अपने संबोधन में मुनीर ने मई 2025 में भारत के साथ हुए संक्षिप्त लेकिन तीव्र सैन्य संघर्ष (Operation Bunyan-un-Marsoos) का भी उल्लेख किया। He claimed that during the May conflict, Pakistan successfully defended its sovereignty against India's 'Operation Sindoor', asserting that faith played a crucial role in their military success. मुनीर, जो एक 'हाफिज-ए-कुरान' हैं, के कार्यकाल में पाकिस्तानी सेना में धार्मिक प्रतीकों और वैचारिक शब्दावली का उपयोग काफी बढ़ गया है। वे विद्रोहियों को 'फितना अल-खवारिज' और भारत के समर्थकों को 'फितना अल-हिंदुस्तान' कहकर संबोधित करते हैं, जो उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि पाकिस्तान की सेना केवल राज्य की ही नहीं, बल्कि इस्लाम की भी रक्षक है।