हनुमान चालीसा का पाठ करते समय रखें इन 10 नियमों का ध्यान: गलतियों से बचें वरना अधूरा रह सकता है पूजा का फल


चण्डीगढ़: बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ सबसे सरल और प्रभावशाली माध्यम माना जाता है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसे करने के कुछ विशेष नियम हैं। अक्सर भक्त अनजाने में पाठ के दौरान ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे उन्हें पूजा का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता। Mistakes like reciting the prayers without bathing, in a state of anger, or at improper times like midday or immediately after sunset can hinder the spiritual benefits. हनुमान जी की कृपा पाने के लिए सबसे जरूरी है कि पाठ करते समय मन में किसी भी प्रकार की नकारात्मकता न हो और न ही उस दौरान किसी व्यक्ति से बातचीत की जाए।

शुद्धता और सही समय हनुमान चालीसा के पाठ की पहली सीढ़ी है, इसलिए हमेशा साफ-सफाई वाले स्थान पर ही आसन ग्रहण करें। It is highly recommended to perform the path during auspicious hours, preferably in the morning or evening, while sitting in front of a lit lamp containing jasmine oil or pure ghee. यदि संभव हो तो दीपक में लाल सूत (धागे) की बाती का उपयोग करें और प्रभु को लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। हनुमान जी को गुड़-चना, बेसन के लड्डू या केसरिया बूंदी का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि ये उनकी प्रिय वस्तुएं मानी गई हैं।

शास्त्रों के अनुसार, संकल्प लेकर 100 बार पाठ करना विशेष फलदायी होता है, लेकिन यदि समय का अभाव हो तो मंगलवार या शनिवार को 1, 3, 5, 11 या 21 बार भी पाठ किया जा सकता है। One important tradition suggests wearing a single unstitched garment (like a dhoti) during the prayer to maintain utmost purity and concentration. निर्बलों को सताने वाले या तामसिक भोजन का सेवन करने वाले लोगों पर हनुमान जी की कृपा नहीं ठहरती, इसलिए चालीसा के पाठ के साथ-साथ आचरण की शुद्धता भी अनिवार्य है। इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण नियमों का पालन करने से साधक के जीवन के सभी संकट पल भर में दूर हो जाते हैं।



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