अटूट प्रेम की मिसाल: एम्बुलेंस के पैसे नहीं थे तो रिक्शे पर पत्नी को ले गया 300 किलोमीटर दूर अस्पताल



संबलपुर (ओडिशा): जब हौसला बुलंद हो और जीवनसाथी के प्रति अगाध प्रेम हो, तो कठिन से कठिन राह भी आसान हो जाती है। ओडिशा के संबलपुर में 70 वर्षीय बाबू लोहार ने इस बात को सच कर दिखाया है। अपनी बीमार पत्नी ज्योति की जान बचाने के लिए उनके पास एम्बुलेंस किराए पर लेने के पैसे नहीं थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बाबू ने अपने पुराने रिक्शा वैन को ही 'देसी एम्बुलेंस' का रूप दिया और कड़ाके की ठंड के बीच अपनी पत्नी को लिटाकर 300 किलोमीटर दूर कटक के अस्पताल के लिए निकल पड़े। यह सफर केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक बुजुर्ग पति के अपने हमसफर के प्रति समर्पण की पराकाष्ठा थी। This extraordinary story of Elderly Love and Resilience from Odisha has touched the hearts of thousands across the nation.

बाबू लोहार की पत्नी को पिछले साल स्ट्रोक आया था, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज में इलाज की सलाह दी थी। आर्थिक तंगी के कारण बाबू लोहार ने 9 दिनों तक लगातार रिक्शा चलाकर संबलपुर से कटक की दूरी तय की। वे प्रतिदिन करीब 30 किलोमीटर का सफर करते थे और रात को सड़क किनारे ही विश्राम करते थे। उनकी यह मेहनत रंग लाई और दो महीने तक अस्पताल में इलाज के बाद उनकी पत्नी की हालत में सुधार हुआ। 19 जनवरी को जब वे वापस लौट रहे थे, तब एक मामूली सड़क हादसे के बाद टांगी थाना पुलिस की नजर उन पर पड़ी। पुलिस ने उनके संघर्ष को जानकर उन्हें सरकारी वाहन से घर पहुंचाने की पेशकश की, जिसे बाबू लोहार ने एक भावुक तर्क के साथ ठुकरा दिया। The 300 km Journey on a Rickshaw reflects the dire financial struggles and the indomitable spirit of common citizens.

पुलिस की मदद लेने से इनकार करते हुए बाबू ने कहा कि उनके जीवन में दो ही प्यार हैं उनकी पत्नी और उनका रिक्शा, और वे किसी को भी रास्ते में अकेला नहीं छोड़ सकते। उन्होंने केवल रास्ते के खर्च के लिए पुलिस से कुछ नकद सहायता स्वीकार की और दोबारा रिक्शे के पैडल पर पैर जमा दिए। 70 साल की उम्र में अपनी पत्नी और रिक्शे के साथ 600 किलोमीटर (आना-जाना) का यह सफर पूरा करना आज के दौर में मानवीय संवेदनाओं और साहस की सबसे बड़ी मिसाल बनकर उभरा है। टांगी थाना प्रभारी विकास सेठी ने भी इस बुजुर्ग के जज्बे को सलाम किया है। His refusal of a police vehicle ride underscored his Unwavering Loyalty to both his wife and the rickshaw that serves as his livelihood.


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