किसानों के लिए राहत: अब ‘Digital Farmer ID’ से ही मिलेगी सब्सिडी वाली खाद



नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश में खाद की बिक्री और वितरण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी में है। 'एग्री स्टैक' (Agri Stack) पहल के अंतर्गत अब यूरिया और अन्य खादों की खरीद को धीरे-धीरे 'डिजिटल फार्मर आईडी' से जोड़ा जाएगा। यह वही विशिष्ट पहचान पत्र है जिसका उपयोग वर्तमान में पीएम-किसान योजना के लाभार्थियों के लिए किया जा रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य खाद की कालाबाजारी को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी का लाभ केवल वास्तविक भू-स्वामियों और अधिकृत बटाईदारों तक ही पहुंचे। The integration of Digital Farmer ID with fertilizer sales aims to eliminate middlemen and ensure that government subsidies reach the rightful cultivators.

सरकार का यह निर्णय फर्टिलाइजर सब्सिडी पर बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुए लिया गया है। चालू वित्त वर्ष (FY26) के लिए सब्सिडी का अनुमान ₹1.68 ट्रिलियन था, जो यूरिया की रिकॉर्ड मांग के चलते ₹1.91 ट्रिलियन को पार करने की संभावना है। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच यूरिया की खपत में 4% की वृद्धि दर्ज की गई है। इस समस्या के समाधान के लिए कृषि मंत्रालय ने पहले चरण में देश के सात चुनिंदा जिलों में एक Pilot Project शुरू करने की कार्ययोजना तैयार की है। इन जिलों में बड़ी संख्या में किसानों की डिजिटल प्रोफाइलिंग पहले ही पूरी की जा चुकी है। The rising cost of Fertilizer Subsidy has prompted the government to leverage the Agri Stack digital foundation for more efficient distribution.

4 दिसंबर 2025 तक देश में लगभग 7.67 करोड़ डिजिटल फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। किसान भाई अपनी आईडी राज्य के एग्री स्टैक पोर्टल, फार्मर रजिस्ट्री ऐप या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर बनवा सकते हैं। इसके लिए आधार ई-केवाईसी (eKYC) और भूमि के दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य है। इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से औद्योगिक इकाइयों की ओर खाद के अवैध डायवर्जन पर लगाम लगेगी और वास्तविक किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सकेगी। Digital Agriculture Mission is working at a fast pace to register every farmer under this unique identification system to streamline all agrarian benefits.



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