ढाका: बांग्लादेश में 2024 के ऐतिहासिक जन आंदोलन और शेख हसीना के तख्तापलट के बाद लोकतंत्र की बहाली के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। देश के आगामी राष्ट्रीय चुनाव के लिए गुरुवार, 22 जनवरी 2026 से आधिकारिक तौर पर प्रचार अभियान की शुरुआत हो गई है। 12 फरवरी 2026 को होने वाले इस मतदान में करीब 13 करोड़ मतदाता नई सरकार का चुनाव करेंगे। नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत हो रहे इन चुनावों में 300 संसदीय सीटों के लिए लगभग 2,000 उम्मीदवार मैदान में हैं। हालांकि, शेख हसीना की पार्टी 'अवामी लीग' को इस चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्षता के सवालों को जन्म दिया है। The upcoming polls are viewed as the most critical democratic transition in Bangladesh's history since its independence.
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने सिलहट के आलिया मदरसा मैदान से अपने चुनावी अभियान का भव्य आगाज़ किया। 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में स्वदेश लौटे रहमान ने अपनी पहली चुनावी रैली में विरोधियों पर जमकर निशाना साधा और 'लोकतंत्र की बहाली' को अपना मुख्य एजेंडा बताया। सिलहट में उमड़ी लाखों की भीड़ के बीच उन्होंने आह्वान किया कि 12 फरवरी का दिन देश को तानाशाही से मुक्त करने का दिन होगा। दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 10 दलों के गठबंधन और छात्र नेताओं द्वारा गठित 'नेशनल सिटिजन पार्टी' (NCP) भी ढाका और उत्तरी जिलों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए रैलियां कर रही हैं। The return of Tarique Rahman has shifted the political gravity, positioning the BNP as the primary contender for power.
इस चुनाव की सबसे अनोखी विशेषता 'जुलाई राष्ट्रीय चार्टर' पर होने वाला जनमत संग्रह (Referendum) है। मतदान के दिन ही लोग इस चार्टर के समर्थन या विरोध में भी वोट डालेंगे, जो भविष्य में प्रधानमंत्री की शक्तियों को सीमित करने और द्विसदनीय संसद (Bicameral Legislature) बनाने जैसे संवैधानिक सुधारों का खाका है। 26 जनवरी को सक्रिय होने वाले अगले पश्चिमी विक्षोभ की तरह ही बांग्लादेश की राजनीति में भी बड़े बदलाव की लहर देखी जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से चुनाव आयोग ने 8 लाख से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सेना की मदद ली जा रही है। The simultaneous holding of a general election and a constitutional referendum marks a watershed moment for institutional reforms in South Asia.