बिहार के सरकारी अस्पतालों में 'दलाल राज' का होगा अंत: 'धावा दल' करेगा औचक निरीक्षण, मिलीभगत मिलने पर डॉक्टरों और कर्मचारियों पर गिरेगी गाज



पटना: बिहार के सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को गुमराह कर निजी नर्सिंग होम और जांच केंद्रों में भेजने वाले 'दलाल राज' को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने निर्णायक कदम उठाया है। स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह ने मंगलवार को सभी जिलाधिकारियों को विशेष ‘धावा दल’ (Flying Squad) गठित करने के निर्देश जारी किए हैं। यह दल मेडिकल कॉलेज अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक का औचक निरीक्षण करेगा। यदि इस दौरान किसी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की दलालों के साथ संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कठोर कानूनी शिकंजा भी कसा जाएगा। The Statewide Crackdown on Hospital Middlemen aims to protect underprivileged patients from being exploited and redirected to expensive private facilities.

स्वास्थ्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सरकारी परिसरों में निजी एम्बुलेंस चालकों, दवा दुकानदारों और निजी जांच केंद्रों के एजेंटों का जमावड़ा लगा रहता है। ये एजेंट अस्पताल के भीतर ही सक्रिय रहते हैं और मासूम मरीजों को सरकारी सुविधाओं से वंचित कर निजी इलाज के जाल में फंसा देते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए गठित धावा दल में वरीय उप समाहर्ता, जिलास्तरीय अधिकारी और डॉक्टर शामिल होंगे। राज्य स्तर पर अपर सचिव धनंजय कुमार को नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है, जो प्रतिदिन की प्रगति की समीक्षा करेंगे। The Formation of Specialized Flying Squads marks a zero-tolerance policy against the 'Check-up Mafia' and nursing home agents operating within government premises.

स्वास्थ्य सचिव ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी पत्र लिखकर सभी जिलों के एसपी-एसएसपी को अस्पतालों की नियमित जांच कराने का अनुरोध किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जो व्यक्ति आम जनता को सरकारी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित करने या जनहित योजनाओं में बाधा पहुंचाने के दोषी पाए जाएंगे, उन पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी। यह चेतावनी उन सरकारी कर्मचारियों के लिए भी है जो कमीशन के लालच में इन दलालों को संरक्षण देते हैं। जिला स्तर पर नियुक्त नोडल अधिकारी हर दिन की कार्रवाई की रिपोर्ट सीधे स्वास्थ्य विभाग को भेजेंगे। This Intensive Surveillance Mechanism is designed to restore public trust in the state's healthcare system and ensure that welfare benefits reach the intended beneficiaries.

सरकार की इस कार्रवाई से उन बिचौलियों में हड़कंप मच गया है जो लंबे समय से अस्पतालों को अपनी कमाई का अड्डा बनाए हुए थे। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि मरीजों को अस्पताल परिसर के भीतर ही मुफ्त दवाएं और जांच की सुविधा बिना किसी बाधा के मिल सके। सरकारी तंत्र का यह सख्त रुख स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। The End of Brokerage in Bihar Hospitals will prioritize patient care and ensure that medical ethics are strictly followed by all on-duty staff.



Previous Post Next Post