ग्वालियर की बेटी शांभवी पाठक थीं अजित पवार के विमान की पायलट, हादसे से कुछ देर पहले दादी को भेजा था 'गुड मॉर्निंग' मैसेज



ग्वालियर: महाराष्ट्र के बारामती में हुए दुखद विमान हादसे ने न केवल राजनीति जगत को स्तब्ध किया है, बल्कि ग्वालियर के एक परिवार पर भी दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। जिस चार्टर्ड प्लेन में उपमुख्यमंत्री अजित पवार सवार थे, उसकी कमान ग्वालियर की होनहार पायलट शांभवी पाठक संभाल रही थीं। हादसे में शांभवी का भी निधन हो गया है। शांभवी का ग्वालियर से गहरा नाता था; उनका जन्म और शुरुआती शिक्षा इसी शहर में हुई थी। हादसे वाले दिन सुबह 6:36 बजे शांभवी ने मुंबई से अपनी दादी मीरा पाठक को 'गुड मॉर्निंग दद्दा' का संदेश भेजा था, जिसके कुछ ही घंटों बाद सुबह 8:46 बजे विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। The Tragic Demise of Pilot Shambhavi Pathak has left her hometown Gwalior in mourning, as she was the one flying the ill-fated aircraft carrying Ajit Pawar.

शांभवी के परिवार का सैन्य पृष्ठभूमि से गहरा जुड़ाव रहा है। उनके पिता भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जिससे शांभवी को बचपन से ही विमानों और आसमान की ऊंचाइयों से लगाव था। उनकी दादी मीरा पाठक, जो वर्तमान में ग्वालियर में रहती हैं, ने बताया कि शांभवी का जन्म कमलाराजा अस्पताल में हुआ था और उन्होंने एयर फोर्स स्कूल से ही अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। बाद में उनका परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया था। शांभवी आखिरी बार पिछले साल अगस्त में अपनी दादी से मिलने ग्वालियर आई थीं। The Aviation Legacy of the Pathak Family inspired Shambhavi to pursue her career as a commercial pilot, following in the footsteps of her father's service to the nation.

शांभवी के निधन की खबर मिलते ही ग्वालियर स्थित उनके पैतृक निवास पर पड़ोसियों और रिश्तेदारों का तांता लग गया। स्थानीय महिलाओं ने उन्हें याद करते हुए बताया कि वे बेहद चंचल और हंसमुख स्वभाव की थीं और जब भी ग्वालियर आती थीं, सबसे गर्मजोशी से मिलती थीं। घर की दीवारों पर सजी उनकी बचपन की तस्वीरें आज उनकी यादें ताजा कर रही हैं। यह हादसा न केवल एक अनुभवी राजनेता के जाने की क्षति है, बल्कि एक उभरती हुई महिला पायलट के सपनों के अंत की भी दुखद कहानी है। The Last Interaction with Grandmother remains a poignant memory for the family, as a simple morning greeting turned out to be her final words to them.



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