प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रहार: पंजाब सरकार की कार्रवाई के खिलाफ भाजपा ने खोला मोर्चा, धूमल बोले—'आप' का हाल भी कांग्रेस जैसा होगा



जालंधर/शिमला: पंजाब सरकार और 'पंजाब केसरी समूह' के बीच छिड़ा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक संग्राम में तब्दील हो गया है। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर प्रेस की आजादी को कुचलने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। प्रो. धूमल ने पंजाब केसरी के खिलाफ हो रही छापेमारी और बिजली काटने की कार्रवाई की तुलना 1975 के आपातकाल से करते हुए इसे 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि आपातकाल के दौरान जब कांग्रेस ने अखबार की बिजली काटी थी, तब पंजाब केसरी ने ट्रैक्टर चलाकर अखबार छापा था और अंततः कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। धूमल ने भविष्यवाणी की कि मीडिया की आवाज दबाने के कारण 'आप' सरकार का अंत भी जल्द ही सत्ता से बेदखली के साथ होगा।

The controversy erupted after Punjab Kesari Group wrote a formal letter to Governor Gulab Chand Kataria, alleging systematic harassment by various government departments following a balanced news report published on October 31, 2025. समूह का आरोप है कि 2 नवंबर से उनके सभी सरकारी विज्ञापन बंद कर दिए गए और 11 से 15 जनवरी 2026 के बीच उनके होटलों और प्रिंटिंग प्रेस पर जीएसटी, आबकारी, एफएसएसएआई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। पत्र में बताया गया है कि जालंधर स्थित होटल की बिजली काट दी गई है और लुधियाना व बठिंडा की प्रिंटिंग प्रेस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, जिससे समाचार पत्र के प्रकाशन पर खतरा मंडरा रहा है। अनुराग ठाकुर ने इसे 'सत्ता का अहंकार' बताते हुए कहा कि सच न तो छापेमारी से रुकता है और न ही धमकियों से।

The management of Punjab Kesari has reminded the administration of their legacy of sacrifice, noting that their founders, Lala Jagat Narain and Ramesh Chandra Chopra, laid down their lives for fearless journalism during the era of terrorism. उन्होंने राज्यपाल से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और मीडिया की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि चुनाव के मुहाने पर खड़े पंजाब में मीडिया संस्थानों को डराना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। फिलहाल, इस कार्रवाई के विरोध में विभिन्न पत्रकार संगठनों ने भी एकजुटता दिखानी शुरू कर दी है, जबकि पंजाब सरकार की ओर से इन छापों को नियमित विभागीय प्रक्रिया बताया जा रहा है।



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