हिमाचल में मौसम का अजीब विरोधाभास: शिमला की रातें सबसे गर्म, तो ताबो में जमा देने वाली बर्फीली हवाओं का टॉर्चर

 


शिमला: हिमाचल प्रदेश में इन दिनों मौसम के अजब-गजब रंग देखने को मिल रहे हैं, जहां एक ओर शिमला की रातें असामान्य रूप से गर्म दर्ज की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर ऊंचाई वाले इलाकों में कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शुक्रवार को शिमला का न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 7.4 डिग्री अधिक है और पूरे प्रदेश में सबसे अधिक रहा। इसके विपरीत, लाहौल-स्पीति के ताबो में पारा शून्य से 5.2 डिग्री नीचे गिर चुका है और वहां 43 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही तूफानी ठंडी हवाओं ने कंपकंपी छुड़ा दी है। हालांकि, लंबे इंतजार के बाद सूखे की मार झेल रहे पहाड़ों पर बर्फबारी की आस जगी है, क्योंकि रोहतांग सहित लाहौल-स्पीति की ऊंची चोटियों और उदयपुर घाटी में हिमपात का दौर शुरू हो गया है।

The state is currently witnessing a climatic paradox where plains and hill stations are experiencing varying intensities of a cold wave despite clear sunny days. मौसम विभाग के अनुसार, 19 से 22 जनवरी के बीच एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से मध्य और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश व बर्फबारी के प्रबल आसार हैं। 20 जनवरी को पूरे राज्य में व्यापक वर्षा का अनुमान है, जिससे खेती और बागवानी के लिए चल रहा सूखे का संकट खत्म हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि ऊना के मैदानी इलाकों और रिकांगपिओ के पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान एक समान (2.8 डिग्री) दर्ज किया गया है, जबकि सोलन (0.1 डिग्री) और कल्पा (0.6 डिग्री) जैसे इलाकों में शीतलहर का प्रकोप जारी है।

The tourism industry and local farmers are eagerly waiting for the season's first major snowfall in Shimla and Manali, which has been delayed significantly this January. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 22 जनवरी तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे चंबा, कुल्लू और किन्नौर में बादल बरसेंगे, जबकि मैदानी जिलों में कोहरे से राहत तो रहेगी लेकिन 'कोल्ड वेव' का अलर्ट जारी रहेगा। शाम ढलते ही पारा तेजी से गिरने के कारण स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों और निवासियों को ठंड से बचाव के पुख्ता इंतजाम करने की सलाह दी है। अगर अगले तीन दिनों में बर्फबारी होती है, तो यह न केवल पर्यटन के लिए संजीवनी होगी बल्कि राज्य की सेब की फसल के लिए आवश्यक 'चिलिंग आवर्स' की कमी को भी पूरा करेगी।


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