मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के लिए गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को हो रहे मतदान के दौरान 'अमिट स्याही' को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने मतदान के बाद मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि वोटर्स की उंगलियों पर पारंपरिक स्याही के बजाय घटिया क्वालिटी के मार्कर पेन का इस्तेमाल किया जा रहा है। राज ठाकरे ने दावा किया कि यह निशान सैनिटाइजर, डेटॉल या नेल पॉलिश रिमूवर से आसानी से मिटाया जा सकता है, जिससे फर्जी मतदान (Bogus Voting) की संभावना बढ़ गई है। उन्होंने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना चाहता है और यह 'मरते हुए लोकतंत्र' का संकेत है।
The controversy gained momentum after several videos surfaced on social media showing voters easily wiping off the ink marks using simple household liquids. विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मार्कर के इस्तेमाल से उन 11 लाख 'डुप्लिकेट' वोटर्स को दोबारा वोट डालने का मौका मिल सकता है जिनके नाम वोटर लिस्ट में संदिग्ध पाए गए थे। राज ठाकरे ने बीजेपी और चुनाव आयोग के बीच 'मिलीभगत' का आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या चुनाव आयोग ने स्याही मिटाने के लिए कोई 'सैनिटाइजर एजेंसी' किराए पर ली है? उन्होंने अपने समर्थकों और शिव सैनिकों से बूथों पर कड़ी निगरानी रखने की अपील की है ताकि कोई भी व्यक्ति स्याही मिटाकर दोबारा मतदान न कर सके।
In response to the allegations, Chief Minister Devendra Fadnavis dismissed the claims as a "narrative of defeat," stating that he too was marked with the same pen and it was not erasing. राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने स्पष्ट किया कि स्थानीय निकाय चुनावों में 2011-12 से ही मार्कर पेन का उपयोग किया जा रहा है। चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने कहा कि स्याही मिटाने की कोशिश करना एक चुनावी कदाचार (Malpractice) है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने तर्क दिया कि केवल स्याही मिटाने से दोबारा वोट नहीं डाला जा सकता क्योंकि पोलिंग बूथ पर मतदाता का विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाता है। विवाद के बाद बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी ने सभी केंद्रों पर स्याही को त्वचा पर ठीक से रगड़कर लगाने के नए निर्देश जारी किए हैं।