बजट 2026 से निवेशकों को बड़ी आस: LTCG छूट की सीमा 2 लाख करने की मांग, टैक्स ढांचे को सरल बनाने पर सरकार का फोकस



नई दिल्ली: 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले शेयर बाजार के निवेशकों और वित्तीय विशेषज्ञों ने अपनी 'विशलिस्ट' सरकार के सामने रख दी है। बाजार के जानकारों का मानना है कि रिटेल इनवेस्टर्स को अधिक प्रोत्साहित करने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर मिलने वाली टैक्स छूट की मौजूदा सीमा को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में मध्यम वर्गीय परिवारों की शेयर बाजार में भागीदारी बढ़ी है, ऐसे में छूट की सीमा बढ़ने से लोग लंबी अवधि के निवेश के लिए और अधिक प्रेरित होंगे। The retail investor community is eyeing a significant relief in capital gains taxation to boost domestic savings flow into the Stock Market.

निवेशकों की दूसरी बड़ी चिंता सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की ऊंची दरों को लेकर है। पिछले बजट में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर STT बढ़ाने से ट्रेडिंग की लागत में इजाफा हुआ था, जिसका सीधा असर बाजार के वॉल्यूम पर पड़ा है। ब्रोकरेज हाउस और ट्रेडर्स की मांग है कि कैश मार्केट में निवेश को बढ़ावा देने के लिए इन दरों को कम किया जाए। इसके साथ ही, अलग-अलग एसेट क्लास जैसे इक्विटी, गोल्ड और रियल एस्टेट के लिए होल्डिंग पीरियड को एक समान करने की भी उम्मीद जताई जा रही है। Experts suggest a uniform 12-month holding period across all asset classes to simplify tax calculations and remove confusion among individual taxpayers.

इसके अतिरिक्त, रियल एस्टेट और सोने के निवेशकों में इंडेक्सेशन लाभ (Indexation Benefit) हटने के बाद से काफी असंतोष देखा गया है। बाजार की मांग है कि सरकार या तो इंडेक्सेशन का लाभ फिर से शुरू करे या फिर टैक्स की दर को 12.5% से घटाकर 10% के स्तर पर लाए। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक फैसला लेती है, तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार को घरेलू निवेशकों से मजबूती मिलती रहेगी। The Union Budget 2026 will be a crucial balancing act for the Finance Minister to manage revenue while satisfying the growing expectations of the Middle Class.


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