नौरादेही टाइगर रिजर्व में चीतों के लिए 'शाही दावत' तैयार: काले हिरणों की बढ़ती संख्या से आबाद हुए घास के मैदान, अफ्रीकी चीतों की शिफ्टिंग की तैयारी तेज



सागर: मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व 'नौरादेही' अब अफ्रीकी चीतों की अगवानी के लिए पूरी तरह सज चुका है। चीतों के आगमन से पहले उनके शिकार और भोजन के लिए प्रबंधन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। खबर है कि नौरादेही के विशाल घास के मैदानों में अब काले हिरणों (Black Bucks) के झुंड बड़े पैमाने पर विचरण करने लगे हैं। साल 2017 में जहाँ यहाँ महज 5 काले हिरण बचे थे, वहीं विभिन्न जिलों से रेस्क्यू कर लाए गए हिरणों और सफल ब्रीडिंग के चलते अब यह संख्या बढ़कर 153 हो गई है। The surge in the black buck population is a crucial step toward establishing a sustainable Prey Base for the upcoming cheetah relocation project.

नौरादेही का इतिहास भारतीय भेड़ियों और काले हिरणों के गढ़ के रूप में रहा है, लेकिन बीच के वर्षों में मानवीय दखल के कारण इनकी संख्या कम हो गई थी। साल 2014 में शुरू हुई विस्थापन प्रक्रिया के बाद अभ्यारण्य के भीतर के गांव खाली कराए गए और उन कृषि भूमियों को फिर से प्राकृतिक घास के मैदानों में तब्दील किया गया। टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार, शाजापुर और अन्य क्षेत्रों से लाए गए काले हिरणों को यहाँ का वातावरण काफी रास आ रहा है। These Expansive Grasslands are providing the perfect habitat for herbivores to flourish, which is essential for the survival of top predators like tigers and cheetahs.

सितंबर 2023 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद यहाँ सुरक्षा और विस्थापन के काम में और तेजी आई है। डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए.ए. अंसारी ने बताया कि काले हिरण खुले मैदानों में रहना पसंद करते हैं और नौरादेही में अब उनके लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध है। चीतों को बसाने के लिए 2010 में हुए सर्वे के बाद से ही यहाँ चरणबद्ध तरीके से तैयारी की जा रही थी। अब जब यहाँ Prey Density (शिकार का घनत्व) बेहतर हो गया है, तो जल्द ही कूनो के बाद नौरादेही में भी चीतों की दहाड़ सुनाई दे सकती है। This strategic growth in wildlife population reflects the success of the National Tiger Conservation Project in the region.



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