चंडीगढ़ पुलिस पर सीबीआई का बड़ा प्रहार: डॉक्टर के अपहरण और सबूतों से छेड़छाड़ के मामलों में इंस्पेक्टरों समेत कई पुलिसकर्मियों पर चार्जशीट दाखिल



चंडीगढ़: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने चंडीगढ़ पुलिस के दामन पर लगे दागों को और गहरा करते हुए दो अलग-अलग गंभीर मामलों में अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है। सोमवार को सीबीआई की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में पेश की गई इस रिपोर्ट में क्राइम ब्रांच के चर्चित इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों और इंस्पेक्टर रामरत्न शर्मा समेत कई पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है। पहला मामला एक प्रतिष्ठित डेंटिस्ट डॉ. मोहित धवन के अपहरण से जुड़ा है, जिन्हें कथित तौर पर अदालत की दहलीज से ही पुलिस ने गैर-कानूनी ढंग से उठा लिया था, जबकि दूसरा मामला एक छेड़छाड़ के आरोपी को बचाने के लिए सबूतों (मोबाइल फोन) के साथ हेराफेरी करने से संबंधित है।

डॉ. मोहित धवन अपहरण मामले में सीबीआई ने एक साल की लंबी जांच के बाद पाया कि इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों की टीम ने 7 जनवरी 2022 को जिला अदालत सेक्टर-43 के बाहर से डॉक्टर को जबरन अगवा किया था। उस वक्त डॉ. धवन पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर जिला अदालत में पेश होने आए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें निजी कार (आई-20) में अगवा कर लिया ताकि वे जज के सामने पेश न हो सकें। The CBI investigation confirmed through mobile tower locations and private vehicle tracing that seven police officers, including SI Suresh Kumar and ASI Ajmer Singh, were involved in keeping the doctor in illegal custody for hours before recording a formal arrest. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, जिसके बाद अब पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण और साजिश की धाराओं के तहत कानूनी शिकंजा कस गया है।

सबूतों से छेड़छाड़ के दूसरे मामले में सीबीआई ने तत्कालीन इंस्पेक्टर रामरत्न शर्मा और एसआई सत्यवान को मुख्य आरोपी बनाया है। मामला साल 2022 का है जब इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने एक मॉल के जीएम के खिलाफ यौन उत्पीड़न का केस दर्ज किया था। आरोप है कि जांच अधिकारियों ने आरोपी को बचाने के लिए उसके जब्त किए गए 'आईफोन-12' को रिकॉर्ड से गायब कर दिया और उसकी जगह बिना सिम वाला पुराना 'आईफोन-7' केस फाइल में लगा दिया। The CBI revealed that the original phone containing potential digital evidence was returned to the accused, while the case file was manipulated to mislead the court. इन दोनों ही मामलों ने चंडीगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और आने वाले दिनों में आरोपी पुलिसकर्मियों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।



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