चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने अग्निवीर योजना के पहले बैच की सेवानिवृत्ति से पहले उनके भविष्य को सुरक्षित करने और राज्य के आपदा प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश में पहली बार गठित की जा रही 'हरियाणा स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स' (HSDRF) में अग्निवीरों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। गृह विभाग ने 1,149 पदों वाली एक पूर्ण बटालियन को मंजूरी दे दी है, जिसमें अधिकतम संख्या उन अग्निवीरों की होगी जो चार साल की सैन्य सेवा पूरी कर लौटेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि सेना से अनुशासित और प्रशिक्षित होकर निकले ये युवा प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों से निपटने के लिए सबसे उपयुक्त बल साबित होंगे।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस नई बल के गठन की रूपरेखा तैयार की गई। 'डिजास्टर मैनेजमेंट (संशोधन) एक्ट-2025' के तहत हरियाणा अब अपनी स्वतंत्र और पेशेवर आपदा प्रतिक्रिया इकाई तैयार कर रहा है। वर्तमान में भोंडसी स्थित IRB की पहली बटालियन नोडल इकाई के रूप में कार्य कर रही है, लेकिन अब इसे एक स्थायी और पूर्णकालिक स्वरूप दिया जाएगा। नई योजना के अनुसार, राज्य के सभी मंडलों (Divisions) में एक-एक 'क्विक रिस्पांस टीम' (QRT) तैनात की जाएगी, जो बाढ़, भूकंप, आगजनी और केमिकल इमरजेंसी जैसी स्थितियों में तत्काल राहत कार्य शुरू करेगी।
अग्निवीरों के लिए नायब सरकार का यह 'सुरक्षा कवच' केवल आपदा प्रबंधन तक सीमित नहीं है। सरकार ने पहले ही पुलिस कांस्टेबल भर्ती में अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत और फॉरेस्ट गार्ड, जेल वार्डन व माइनिंग गार्ड जैसी सीधी भर्तियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण का प्रावधान किया है। इसके अलावा, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के पदों पर भर्ती के लिए उन्हें आयु सीमा में 3 से 5 वर्ष की विशेष छूट भी दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, एनडीएमए (NDMA) के दिशा-निर्देशों के तहत HSDRF के लिए आधुनिक उपकरण, विशेष वर्दी और अलग बुनियादी ढांचे का निर्माण जल्द शुरू होगा, जिससे हरियाणा आपदाओं के प्रति अधिक लचीला और सक्षम राज्य बन सकेगा।