मुंडगोड (कर्नाटक): तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने दक्षिण भारत के द्रेपुंग गोमांग मठ में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह के दौरान अपने देश लौटने की प्रबल इच्छा व्यक्त की है। वीरवार को गादेन फोद्रांग कार्यालय द्वारा जारी एक वीडियो के अनुसार, परम पावन ने एक श्रद्धालु से बातचीत में स्पष्ट रूप से कहा कि वे "निश्चित रूप से तिब्बत लौटेंगे।" दलाई लामा ने एक सकारात्मक संकेत देते हुए यह भी कहा कि संभव है कि वहां की चीनी जनता उनका स्वागत करे। उन्होंने मध्य मार्ग (Middle Way Approach) का उल्लेख करते हुए टिप्पणी की कि यदि तिब्बती लोग पूर्ण स्वतंत्रता के बजाय वास्तविक स्वायत्तता की बात करें, तो चीनी पक्ष भी जिम्मेदारी लेगा और संतोष व्यक्त करेगा।
The spiritual leader's words have sparked a new wave of hope among the Tibetan diaspora as he addressed a gathering of nearly 390 devotees during the public audience. द्रेपुंग गोमांग मठ के कोषाध्यक्ष गेशे मोनलाम ग्यात्सो ने बताया कि इस अवसर पर आयोजित शीतकालीन महासम्मेलन में विभिन्न मठों के लगभग एक हजार भिक्षु और विद्यार्थी शामिल हुए, जहां भारतीय बौद्ध दर्शन पर गहन चर्चा की गई। दलाई लामा ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए शांति और आपसी समझ का संदेश दिया। उनके इस बयान को तिब्बत-चीन मुद्दे के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।
The upcoming days in Karnataka will be of great significance for the Tibetan community as special prayers are scheduled for the leader's health and longevity. गादेन फोद्रांग ट्रस्ट के अनुसार, 21 जनवरी को मुंडगोड स्थित गादेन मठ परिसर में दलाई लामा की दीर्घायु के लिए एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें वे स्वयं उपस्थित रहेंगे। यह दौरा और उनके द्वारा दिए गए बयान वर्तमान वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में तिब्बती आंदोलन की भविष्य की दिशा को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।