नई दिल्ली/शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के 2.5 लाख सेब बागवानों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा है। शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशी सेबों के बढ़ते आयात से हिमाचल की ₹4,500 करोड़ की सेब आर्थिकी खतरे में है। उन्होंने मांग की है कि हिमाचल के सेब सीजन (जुलाई से नवंबर) के दौरान विदेशी सेब के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और ऑफ-सीजन में घरेलू किसानों को प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए आयात शुल्क (Import Duty) को बढ़ाकर 100% किया जाए। सीएम ने विशेष रूप से न्यूजीलैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते पर चिंता जताई, जिसके कारण कोल्ड स्टोरेज में रखे हिमाचल के सेबों के दाम गिर रहे हैं।
The Chief Minister highlighted that apple production accounts for 80% of the state's total fruit output, providing nearly 10 lakh man-days of employment. वित्त मंत्री के साथ चर्चा में उन्होंने प्रदेश के लिए राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को बढ़ाकर ₹10,000 करोड़ प्रतिवर्ष करने और पहाड़ी राज्यों के लिए ₹50,000 करोड़ के वार्षिक 'ग्रीन फंड' के गठन की भी पैरवी की। सुक्खू ने आपदा जोखिम सूचकांक को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की चुनौतियों की तुलना मैदानी इलाकों से नहीं की जा सकती। इस दौरान उन्होंने प्रदेश भाजपा नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर बागवानों के हितों की बात दिल्ली में रखनी चाहिए।
Following his meeting with the Finance Minister, CM Sukhu also met Union Health Minister J.P. Nadda to seek central assistance for the Ayushman Bharat scheme and health infrastructure in the state. मुख्यमंत्री आज केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और पीयूष गोयल से भी मुलाकात कर सकते हैं, जिसमें शानन प्रोजेक्ट (Shanan Project) को हिमाचल को वापस सौंपने और बीबीएमबी (BBMB) में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही, वे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और टाउनशिप विकास के लिए केंद्रीय निधि की मांग भी करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दिल्ली दौरा हिमाचल के आर्थिक और सामरिक हितों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।