दिल्ली में प्रदूषण का जानलेवा प्रहार: 2024 में सांस की बीमारियों ने ली 9211 जान, हर साल बढ़ रहा है मौतों का आंकड़ा



नई दिल्ली: दिल्ली की जहरीली हवा अब केवल आंखों में जलन और खांसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो रही है। दिल्ली सरकार द्वारा जारी साल 2024 के ताज़ा आंकड़ों ने राजधानी में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में सांस संबंधी बीमारियों (Respiratory Diseases) के कारण कुल 9,211 लोगों की मौत हुई है। यह संख्या साल 2023 में हुई 8,801 मौतों के मुकाबले कहीं अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों के दौरान बढ़ा प्रदूषण स्तर अस्थमा, निमोनिया और फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों को घातक बना रहा है, जिससे मरने वालों की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है।

The latest government data reveals that respiratory ailments have now become the third leading cause of death in the capital, trailing only behind cardiovascular diseases and infectious parasites. 2024 में हृदय संबंधी रोगों ने जहां 21,262 लोगों की जान ली, वहीं संक्रामक रोगों से 16,060 मौतें दर्ज की गईं। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में कुल मौतों का आंकड़ा भी बढ़कर 1.39 लाख तक पहुंच गया है, जो पिछले साल 1.32 लाख था। इसका मतलब है कि दिल्ली में हर दिन औसतन 381 लोग दम तोड़ रहे हैं। पुरुषों में मृत्यु दर महिलाओं की तुलना में अधिक देखी गई है, जिसमें 85,391 पुरुष और 54,051 महिलाएं शामिल हैं।

Despite temporary relief from GRAP-3 and GRAP-4 restrictions due to clearer skies recently, the long-term impact of pollution remains a ticking time bomb for the city's health infrastructure. डॉक्टरों के अनुसार, हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM 2.5) फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर रक्त प्रवाह में मिल जाते हैं, जिससे न केवल सांस बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। सरकार के लिए ये आंकड़े एक बड़ी चुनौती हैं, जो दर्शाते हैं कि प्रदूषण नियंत्रण के मौजूदा प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो राजधानी के स्वास्थ्य ढांचे पर यह दबाव असहनीय हो सकता है।



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