'पंजाब केसरी' पर कार्रवाई से गरमाई सियासत: सीएम सैनी और हुड्डा का 'आप' सरकार पर कड़ा प्रहार, सुरजेवाला बोले— "ये तानाशाही है"


चंडीगढ़: पंजाब में 'पंजाब केसरी' समूह के खिलाफ राज्य सरकार की हालिया कार्रवाई ने एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला सहित विपक्ष के तमाम दिग्गजों ने भगवंत मान सरकार को आड़े हाथों लिया है। सीएम नायब सिंह सैनी ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब को बर्बादी की कगार पर पहुंचाने के बाद अब 'आप' सरकार जनआक्रोश से डरकर मीडिया को दबाने पर उतर आई है। उन्होंने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सुनियोजित हमला बताते हुए कहा कि अपनी विफलताओं और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचला जा रहा है।


The opposition has united in condemning the state's move, labeling the simultaneous raids, license cancellations, and power cuts at the newspaper's facility as a "pre-planned conspiracy." पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि स्वतंत्र मीडिया की आवाज दबाने की साजिश है। वहीं, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा ने इसे सत्ता का खुला दुरुपयोग करार देते हुए कहा कि जनहित की खबरें दिखाने की सजा किसी संस्थान को मिलना संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही एक सुर में कहा है कि इतिहास गवाह है कि जो सरकारें अभिव्यक्ति की आजादी को दबाती हैं, उनका पतन निश्चित होता है।



Randeep Surjewala took a scathing dig at the Bhagwant Mann government, stating that while Punjab Kesari survived the dark days of terrorism, it is now being targeted by a government that wants to control every word the media speaks. उन्होंने कहा कि आज सरकारी दफ्तर न्यूज़रूम बन गए हैं और न्यूज़रूम को जेल जैसा बनाने की कोशिश की जा रही है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने भी संस्थान के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा कि सच की आवाज को डराने के प्रयास कभी सफल नहीं होंगे। इस विवाद ने पंजाब और हरियाणा की राजनीति में एक नया मोर्चा खोल दिया है, जहां 'आप' सरकार पर प्रेस की स्वतंत्रता को बंधक बनाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।



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