दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला: कार्बन क्रेडिट से सरकार कमाएगी करोड़ों, प्रदूषण कम करने के बदले मिलेगा मोटा राजस्व



नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को कमाई का जरिया बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क' को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में तय किया गया कि दिल्ली की विभिन्न हरित परियोजनाओं जैसे इलेक्ट्रिक बसों के संचालन, सौर ऊर्जा के विस्तार और लैंडफिल साइटों से बायोगैस उत्पादन से होने वाली कार्बन उत्सर्जन की कमी को अब 'कार्बन क्रेडिट' में बदला जाएगा। इन क्रेडिट्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचकर सरकार करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाएगी। खास बात यह है कि इस पूरी योजना से सरकारी खजाने पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा, बल्कि प्रदूषण कम करने के बदले दिल्ली को बाहरी निवेश और मुनाफा मिलेगा।

The framework operates on a metric where one carbon credit is issued for every metric ton of CO₂ (or equivalent greenhouse gas) reduced. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार, इन क्रेडिट्स को 'वीरा' और 'गोल्ड स्टैंडर्ड' जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रजिस्टर किया जाएगा। सरकार इस प्रक्रिया के लिए तीन विशेषज्ञ एजेंसियों को पैनल में शामिल करेगी, जो वैज्ञानिक तरीके से उत्सर्जन कटौती को मापेंगी और ट्रेडिंग में मदद करेंगी। यह पूरा मॉडल राजस्व-साझेदारी (Revenue-Sharing) पर आधारित होगा, जिसमें एजेंसियां अपनी फीस प्रोजेक्ट की सफलता और क्रेडिट की बिक्री के बाद ही लेंगी। दिल्ली ने इस मॉडल के लिए इंदौर और मेघालय जैसे राज्यों की सफलता से प्रेरणा ली है, जिन्होंने पहले ही कार्बन ट्रेडिंग से लाखों रुपये कमाए हैं।

In another major administrative reform, the Delhi Cabinet has decided to shut down the debt-ridden Delhi Financial Corporation (DFC). यह संस्था लंबे समय से घाटे में चल रही थी और इसका बैड लोन (NPA) बढ़कर 55.8 प्रतिशत तक पहुंच गया था। सरकार का मानना है कि घाटे वाली संस्थाओं को बंद कर संसाधनों का बेहतर उपयोग सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकता है। कार्बन क्रेडिट से होने वाली कमाई को सीधे राज्य के 'कंसॉलिडेटेड फंड' में जमा किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल यमुना की सफाई और शहरी वानिकी जैसे विकास कार्यों को तेज करने में होगा। इस फैसले के साथ दिल्ली अब कार्बन बाजार का लाभ उठाने वाला देश का अग्रणी शहरी केंद्र बनने की राह पर है।



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