सागर/नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश के परिवहन बुनियादी ढांचे को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। आगामी Union Budget 2026 में सरकार का मुख्य फोकस 'ग्रीन' और 'इलेक्ट्रिक' नेशनल एक्सप्रेसवे पर होगा। सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय आगामी बजट में इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे के विकास के लिए 5,000 करोड़ रुपये का विशेष फंड आवंटित करने की तैयारी में है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत दिल्ली-जयपुर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के चुनिंदा सेक्शन को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर स्वीडन और जर्मनी के 'ओवरहेड केबल मॉडल' पर विकसित किया जाएगा।
केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री Nitin Gadkari ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि भारत अब पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए बिजली से चलने वाले भारी वाहनों (ई-ट्रक और ई-बसें) को बढ़ावा देगा। इस 'ई-हाइवे' तकनीक में सड़क के ऊपर इलेक्ट्रिक लाइन बिछाई जाएगी, जिससे गुजरते समय भारी वाहन चार्ज हो सकेंगे। इसके अलावा, हर 40-50 किलोमीटर पर 'फास्ट चार्जिंग स्टेशन' और 'बैटरी एक्सचेंज सेंटर' बनाए जाएंगे, जिन्हें मुख्य रूप से सौर ऊर्जा (Green Energy) से संचालित किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य माल ढुलाई की लागत में 70% तक की कमी लाना और कार्बन उत्सर्जन को शून्य की ओर ले जाना है।
सरकार ने Project 2030 के तहत देश के प्रमुख 12 नेशनल कॉरिडोर्स को इलेक्ट्रिक हाइवे में बदलने का लक्ष्य रखा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, जो मार्च 2026 तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है, दुनिया का सबसे लंबा इलेक्ट्रिक हाईवे बनने की क्षमता रखता है। इस तकनीक से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि भारत कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाले अरबों डॉलर भी बचा सकेगा। National Highways for Electric Vehicles (NHEV) के तहत इन सड़कों पर इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए अलग से लेन भी आरक्षित की जा सकती है, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक नया 'ई-क्रांति' का आगाज होगा।