पानीपत/उचाना: किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल और अभिमन्यु कोहाड़ ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक नए और व्यापक देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। इस अभियान के तहत 7 फरवरी को कन्याकुमारी से 'किसान जागृति यात्रा' शुरू की जाएगी, जो कन्याकुमारी से कश्मीर तक का सफर तय करेगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने, किसानों की कर्ज मुक्ति और भूमि अधिग्रहण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर देश भर के अन्नदाताओं को एकजुट करना है। उचाना खुर्द में बीकेयू (एकता सिद्धूपुर) की बैठक के दौरान डल्लेवाल ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा केवल पैदल ही नहीं, बल्कि ट्रैक्टर और गाड़ियों के माध्यम से भी निकाली जाएगी। The nationwide mobilization marks a strategic escalation in the farmers' persistent demand for structural reforms and financial security in the agricultural sector.
इस आंदोलन की रणनीति के तहत संगठन के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर किसानों से संपर्क करेंगे और विभिन्न मांगों से संबंधित एक प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर करवाएंगे। किसान नेताओं का लक्ष्य है कि देश के कोने-कोने से लाखों किसानों के समर्थन वाले ये हस्ताक्षर युक्त प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपे जाएं। अभिमन्यु कोहाड़ ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आज किसानों की जमीन और भविष्य दोनों खतरे में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगों के नाम पर उपजाऊ जमीनों का अधिग्रहण कर रही है, जबकि पहले से अधिग्रहित की गई 60 से 65 प्रतिशत जमीनें आज भी खाली पड़ी हैं। The systematic signature campaign across rural India is designed to create a grassroots mandate against the current land acquisition and pricing policies of the government.
इस लंबी यात्रा का भव्य समापन 19 मार्च को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में होगा, जहाँ एक विशाल 'किसान महापंचायत' का आयोजन किया जाएगा। नेताओं का दावा है कि इस महापंचायत में देश भर से लाखों किसान शामिल होंगे, जो सरकार के सामने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। बैठक के दौरान विक्की ढांडा, सुनील उझाना और अनिल बेनीवाल सहित कई प्रमुख किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का संकल्प लिया। किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी फसलों का सही भाव और कर्जों से मुक्ति नहीं मिलती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। This planned grand assembly in the national capital serves as a deadline for the administration to address the long-standing grievances of the agrarian community.