अलवर: राजस्थान के दो चर्चित हत्याकांडों में उम्रकैद की सजा काट रहे प्रिया सेठ और हनुमान प्रसाद शुक्रवार को बसंत पंचमी के अबूझ सावे पर विवाह के बंधन में बंध गए। जेल की सलाखों के पीछे शुरू हुई इस अनोखी प्रेम कहानी ने तब हकीकत का रूप लिया जब हाईकोर्ट के निर्देश पर दोनों को विवाह के लिए पैरोल मिली। हालांकि, सोशल मीडिया पर उनकी शादी का निमंत्रण पत्र (Invitation Card) वायरल होने के कारण दूल्हा-दुल्हन को अंतिम समय में अपना वेन्यू बदलना पड़ा। पहले शादी अलवर के बड़ौदामेव कस्बे में होनी थी, लेकिन मीडिया और लोगों की भारी भीड़ से बचने के लिए इसे गुपचुप तरीके से एक निजी होटल में संपन्न कराया गया। The union of two high-profile convicts under parole has sparked a national debate on the legal and social aspects of prisoners' rights to a family life.
शादी की जगह बदलने का मुख्य कारण निमंत्रण पत्र पर छपा दूल्हे हनुमान का मोबाइल नंबर था, जिसके वायरल होने के बाद उन्हें लगातार फोन और धमकियां मिल रही थीं। बड़ौदामेव स्थित हनुमान के पुश्तैनी घर पर जहां पहले सजावट और रौनक थी, वहां शादी के दिन सन्नाटा पसरा रहा, जिससे इलाके में शादी टलने की अफवाहें भी उड़ने लगीं। इस निजी समारोह में केवल परिवार के सदस्य और बेहद करीबी रिश्तेदार ही शामिल हुए। हनुमान की मां चंद्रकला ने इस मौके पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वे अपने बेटे की नई जिंदगी की शुरुआत से संतुष्ट हैं और उम्मीद करती हैं कि दोनों का भविष्य बेहतर होगा। The last-minute logistical shift reflects the intense public scrutiny and safety concerns surrounding the marriage of two individuals convicted of grave offenses.
गौरतलब है कि 34 वर्षीय प्रिया सेठ को 2018 में जयपुर के दुष्यंत शर्मा हत्याकांड में दोषी ठहराया गया था, जिनसे वह एक डेटिंग ऐप के जरिए मिली थी। वहीं, 29 वर्षीय हनुमान प्रसाद को 2017 में अलवर में एक व्यक्ति और उसके परिवार के चार सदस्यों की सामूहिक हत्या के मामले में उम्रकैद हुई थी। दोनों को साल 2023 में सजा सुनाई गई थी और वे जयपुर की खुली जेल (Open Jail) में अपनी सजा काट रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास की दिशा में एक नया उदाहरण पेश करता है। The background of both partners adds a complex layer of intrigue and caution to their publicized romantic journey, which culminated in a quiet ceremony away from the limelight.