शिमला: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने नशे के खिलाफ जारी कानूनी सख्ती और पंचायत चुनावों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि चिट्टा (सिंथेटिक ड्रग्स) के आरोपियों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकना कानून सम्मत नहीं है। Governor Shiv Pratap Shukla emphasized that individuals cannot be held hostage by stripping away their democratic rights; instead, a massive public awareness campaign is needed to curb the drug menace rather than relying solely on administrative restrictions. उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा पूर्व में आरोपियों की सुविधाएं रोकने की मांग को भी उन्होंने अव्यवहारिक बताया था और अब यदि सरकार ऐसा कोई कदम उठाती है, तो इसकी व्यापक स्वीकार्यता होना कठिन है।
नशे के खिलाफ लड़ाई पर राज्यपाल ने जोर देते हुए कहा कि केवल होर्डिंग लगाने या नारे बोलने से समाधान नहीं होगा। शासन और प्रशासन के प्रयासों के साथ-साथ जब तक जनता को जागरूक कर जनजागरण अभियान नहीं चलाया जाएगा, तब तक इस बुराई पर लगाम लगाना संभव नहीं है। He suggested that while drug traffickers must face the full force of the law, the societal focus should shift towards grassroots awareness to prevent the youth from falling into this trap. राज्यपाल ने पंचायत प्रतिनिधियों को समाज में सुधार के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया, लेकिन संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहने की सलाह दी।
दूसरी ओर, तिब्बत के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर एक सुखद खबर सामने आई है। राज्यपाल ने जानकारी दी कि शिपकी-ला दर्रे के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा और व्यापार की पुनः शुरुआत के विकल्पों पर केंद्रीय विदेश मंत्रालय सक्रिय रूप से काम कर रहा है। The reopening of the historic Shipki-La pass for trade will benefit traders not only in Kinnaur but across India, allowing the export of identified goods and the import of Pashmina and other traditional items from Tibet. यह दर्रा सदियों से भारत और चीन अधिकृत तिब्बत के बीच ऊन, मसालों और हस्तशिल्प के आदान-प्रदान का प्रमुख केंद्र रहा है। इस मार्ग के खुलने से 'ओल्ड सिल्क रूट' की यादें ताजा होने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिकी को भी बड़ा बल मिलेगा।