हरिद्वार: उत्तराखंड के तीर्थ नगरी हरिद्वार की मर्यादा और धार्मिक पवित्रता को लेकर श्री गंगा सभा ने एक कड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को हर की पौड़ी क्षेत्र के सभी प्रवेश मार्गों, पुलों और खंभों पर 'अहिंदू निषेध क्षेत्र' लिखे बोर्ड लगा दिए गए हैं। यह कार्रवाई हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद की गई है, जिसमें दो युवक अरबी वेशभूषा (कंदूरा) पहनकर घाटों पर घूमते नजर आए थे। हालांकि, पुलिस जांच में पता चला कि वे दोनों हिंदू थे और केवल यूट्यूब वीडियो के लिए प्रैंक कर रहे थे, लेकिन इस घटना ने तीर्थ पुरोहितों और संतों में भारी रोष पैदा कर दिया। गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि हरिद्वार नगर पालिका अधिनियम 1916 के तहत पहले से मौजूद उपनियमों की सार्वजनिक जानकारी है, ताकि कोई भ्रम न रहे।
The demand to declare the entire Haridwar Kumbh area as a 'Hindu Zone' is gaining momentum ahead of the 2027 Ardh Kumbh. गंगा सभा ने उत्तराखंड सरकार से अपील की है कि न केवल हर की पौड़ी, बल्कि कुंभ क्षेत्र के सभी 105 गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। सभा ने सरकारी विभागों और मीडिया संस्थानों से भी आग्रह किया है कि वे इस संवेदनशील क्षेत्र में अपने गैर-हिंदू कर्मचारियों या पत्रकारों की नियुक्ति न करें। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी संकेतों में कहा है कि सरकार इस प्राचीन मर्यादा और 1916 के समझौते की संवैधानिक वैधता की समीक्षा कर रही है। वर्तमान में, हर की पौड़ी और मालवीय द्वीप क्षेत्र में न केवल प्रवेश, बल्कि ड्रोन उड़ाने, फिल्मी गानों पर रील बनाने और किसी भी प्रकार की व्यावसायिक वीडियो शूटिंग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
The local administration, including Municipal Commissioner Nandan Kumar, confirmed that the 1916 bylaws specifically restrict non-Hindus from the core island area of Har Ki Pauri. संतों और तीर्थ पुरोहितों का तर्क है कि सनातन परंपरा और मां गंगा की धार्मिक अस्मिता सर्वोपरि है, और किसी भी असामाजिक तत्व को वेश बदलकर यहां की शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पुलिस ने रील बनाने वाले उन दोनों युवकों का चालान कर माफी मंगवाई है, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा और धार्मिक नियमों के पालन पर एक नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में, सरकार इस मांग पर क्या आधिकारिक निर्णय लेती है, इस पर देशभर के श्रद्धालुओं की नजरें टिकी हुई हैं।