चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पहली कक्षा (Class 1) में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु सीमा बढ़ा दी है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पहली कक्षा में प्रवेश पाने के लिए बच्चे की आयु 6 वर्ष पूर्ण होना अनिवार्य होगी। The new rule aligns Haryana's education policy with the National Education Policy (NEP 2020) and recent directives from the Punjab and Haryana High Court, effectively ending the previous practice of admitting children at the age of 5.5 years.
इस महत्वपूर्ण बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य बच्चों की मानसिक और शारीरिक परिपक्वता को सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों और शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि 6 वर्ष की आयु में बच्चा औपचारिक स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम और मानसिक दबाव को झेलने के लिए अधिक सक्षम होता है। The High Court's clarification in the 'Divisha Yadav vs State of Haryana' case further reinforced that state regulations must strictly follow central laws to maintain uniformity across the country. नई शिक्षा नीति के '5+3+3+4' मॉडल के तहत, शुरुआती तीन साल प्री-स्कूल या बालवाटिका के लिए निर्धारित हैं, जिसके बाद ही बच्चा पहली कक्षा में कदम रखेगा।
अभिभावकों के लिए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब आयु सीमा में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। जो बच्चे निर्धारित आयु पूरी नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें बालवाटिका कक्षाओं में दाखिला लेना होगा ताकि उनका शैक्षणिक आधार मजबूत हो सके। School education directorate has issued strict instructions to all private and government schools across the state to prominently display this new age criteria in their admission notices. सरकार का मानना है कि इस कदम से छात्रों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और छोटे बच्चों पर पड़ने वाला अनावश्यक पढ़ाई का बोझ कम होगा।