तेहरान/ईरान: ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब एक भयावह रूप ले लिया है। जमीन पर मौजूद डॉक्टरों और मानवाधिकार संगठनों की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार की दमनकारी कार्रवाई में अब तक कम से कम 16,500 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और लगभग 3,30,000 लोग घायल हुए हैं। Protests that initially began over record inflation and the collapse of the rial have turned into a full-scale uprising against Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei. जमीन पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार, अधिकांश हताहतों को सिर, गर्दन और छाती पर सीधे गोलियां मारी गई हैं, जो सुरक्षा बलों द्वारा सैन्य-ग्रेड हथियारों के घातक इस्तेमाल की ओर इशारा करते हैं।
मानवाधिकार संस्था HRANA ने अब तक 3,090 मौतों और 22,000 से अधिक गिरफ्तारियों की पुष्टि की है, जबकि अन्य वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स यह संख्या 12,000 से 20,000 के बीच बता रही हैं। Supreme Leader Khamenei acknowledged "several thousand" deaths for the first time on January 17, but labeled the protesters as "foot soldiers of America" and called President Donald Trump a criminal for backing the unrest. तेहरान के प्रमुख अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार, हजारों लोग अपनी आंखें खो चुके हैं, जिसे डॉक्टरों ने 'डिजिटल अंधेरे' (इंटरनेट ब्लैकआउट) की आड़ में किया गया नरसंहार करार दिया है। कई मामलों में सुरक्षा बलों ने घायलों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन तक देने से रोक दिया, जिससे मौतों का आंकड़ा और बढ़ गया।
ईरान में पिछले कई हफ्तों से पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट जारी है, जिससे सूचनाओं का बाहर आना लगभग असंभव हो गया है। Despite the blackout, reports from makeshift morgues like Kahrizak suggest an overflow of bodies, indicating the severity of the crackdown on January 8 and 9. जर्मन-ईरानी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह दमन अब बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पहुँच गया है, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का खुला उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक शक्तियों ने इस हिंसा को तुरंत रोकने और मौतों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।