पहाड़ी राज्यों के इंजीनियरों के लिए केंद्र की बड़ी पहल: NHIDCL में नौकरी के साथ मिलेगा ₹80,000 तक मानदेय



नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों के युवा सिविल इंजीनियरों के लिए एक ऐतिहासिक 'ग्रैजुएट इंजीनियर स्कीम' की शुरुआत की है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत आने वाले सार्वजनिक उपक्रम NHIDCL द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को आधुनिक तकनीक से लैस करना और पहाड़ों की भौगोलिक चुनौतियों के बीच प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का अनुभव देना है। फरवरी माह में शुरू होने वाली इस भर्ती प्रक्रिया के तहत प्रथम चरण में 64 सिविल इंजीनियरों की नियुक्ति की जाएगी। यह भर्ती विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों के स्थानीय डोमिसाइल धारकों के लिए आरक्षित होगी।

Under this scheme, selected candidates will receive a monthly stipend ranging from ₹70,000 to ₹80,000, along with a 5% annual increment. चयनित इंजीनियरों को शुरुआत में दो साल के लिए नियुक्त किया जाएगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर एक अतिरिक्त वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है। इस पहल का मुख्य लाभ यह है कि स्थानीय इंजीनियर अपनी जमीन की पारिस्थितिकी और चुनौतियों को बेहतर समझते हैं, जिससे दुर्गम इलाकों में चल रहे राष्ट्रीय राजमार्गों, सुरंगों और पुलों के निर्माण में तेजी आएगी। साथ ही, इससे स्थानीय प्रतिभाओं का महानगरों की ओर होने वाला पलायन भी रुकेगा।

Eligibility for this prestigious scheme requires a degree in Civil Engineering from top-ranked institutions like IITs, NITs, or NIRF top 100 colleges. योजना के तहत अंतिम वर्ष के छात्र भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते कार्यभार संभालने तक उनकी डिग्री पूरी हो जाए। नियुक्त इंजीनियरों को डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) की समीक्षा, भूमि अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन से समन्वय और निर्माण स्थल की गुणवत्ता व सुरक्षा निगरानी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। सरकार का मानना है कि यह अनुभव इन युवाओं को भविष्य में राज्य सरकारों के विकास कार्यों में भी बड़ी भूमिका निभाने के काबिल बनाएगा।



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