बक्सर के वीर सपूत हवलदार सुनील सिंह को मरणोपरांत सेना मेडल: 'ऑपरेशन सिंदूर' में घायल होकर भी बचाई थी साथियों की जान


चौसा/बक्सर: देश की सरहदों की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले बक्सर के लाल हवलदार सुनील कुमार सिंह को मरणोपरांत 'सेना मेडल (वीरता)' से सम्मानित किया गया है। राजस्थान के जयपुर में आयोजित 78वें सेना दिवस समारोह के दौरान सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यह गौरवपूर्ण सम्मान बलिदानी की पत्नी सुजाता देवी को सौंपा। 9 मई 2025 की रात 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान हवलदार सुनील ने जो अदम्य साहस दिखाया, उसने न केवल दुश्मन के नापाक इरादों को नाकाम किया, बल्कि अपने कई साथी जवानों की जान भी बचाई। जब समारोह में उनके बलिदान की गाथा पढ़ी गई, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल 'अमर रहे' के नारों से गूंज उठा।

The citation for the gallantry award highlighted Havildar Sunil's extraordinary presence of mind and bravery under heavy cross-border shelling. 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी में तैनात सुनील सिंह ने देखा कि दुश्मन के छह ड्रोन उनकी पोस्ट की ओर बढ़ रहे हैं। खतरे को भांपते हुए उन्होंने तुरंत अपनी यूनिट को अलर्ट किया और खुद खुले मैदान में आकर राइफल से ड्रोनों पर फायरिंग शुरू कर दी। इसी बीच दुश्मन का एक गोला उनके करीब फटा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। अत्यधिक रक्तस्राव और असहनीय दर्द के बावजूद सुनील सिंह पीछे नहीं हटे और अंतिम सांस तक ड्रोनों की सटीक लोकेशन अपने साथियों को रेडियो पर देते रहे, जिससे सेना उन ड्रोनों को मार गिराने में सफल रही।

The entire district of Buxar is swelling with pride as the news of this military honor reached his native village, Narbatpur. बलिदानी सुनील सिंह की वीरता ने यह साबित कर दिया कि भारतीय सैनिक विषम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हैं। उनके परिवार ने कहा कि सुनील का जाना एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उन्हें गर्व है कि उनके घर के बेटे ने देश की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की और आज सेना ने उनके साहस को सर्वोच्च सम्मान दिया है। चौसा नगर पंचायत के स्थानीय निवासियों ने बलिदानी की याद में एक स्मारक बनाने की भी मांग की है ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी वीरता से प्रेरणा ले सकें।



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