नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय टीम के साथ देश की राजधानी दिल्ली पहुंच गए हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले सेब बागवानों के हितों और राज्य की वित्तीय स्थिति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री सुक्खू केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर न्यूजीलैंड से आने वाले सेब पर आयात शुल्क (Import Duty) को 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करने के केंद्र के फैसले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराएंगे। बागवानों का तर्क है कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत शुल्क में कटौती से विदेशी सेब सस्ता हो जाएगा, जिससे हिमाचल के 5,000 करोड़ रुपये के सेब उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
The Chief Minister is accompanied by a strategic team including Principal Advisor Ram Subhag Singh and Finance Secretary Devesh Kumar to discuss critical fiscal matters ahead of the Union Budget on February 1. सुक्खू का मुख्य एजेंडा हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की मांग करना और आपदा राहत के लिए घोषित ₹1,500 करोड़ की राशि को जल्द जारी करवाना है। इसके अतिरिक्त, वे राज्य की ऋण सीमा (Borrowing Limit) बढ़ाने और राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) जैसे विषयों पर भी केंद्र के समक्ष मजबूती से पक्ष रखेंगे। बागवानों की मांग है कि सेब को 'संवेदनशील उत्पाद' की श्रेणी में रखा जाए ताकि घरेलू बाजारों में स्थानीय उपज के दाम न गिरें।
The visit is also expected to have a political dimension as CM Sukhu might hold discussions with the Congress central leadership regarding potential cabinet expansion and organizational appointments in the state. मुख्यमंत्री का यह दिल्ली प्रवास नीति आयोग के साथ भी मंत्रणा का साक्षी बनेगा, जहाँ हिमाचल के 'ग्रीन स्टेट' विजन और अधोसंरचना विकास की परियोजनाओं पर चर्चा की जाएगी। सेब उत्पादकों के संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र ने आयात शुल्क का फैसला वापस नहीं लिया, तो वे दिल्ली कूच करने को मजबूर होंगे। ऐसे में मुख्यमंत्री की यह पैरवी प्रदेश के लाखों परिवारों की आजीविका सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।