नई दिल्ली: जब पूरी दुनिया युद्ध, मुद्रास्फीति और आर्थिक सुस्ती के भंवर में फंसी है, तब भारत का आगामी Union Budget 2026 अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक 'ग्लोबल स्टेबलाइजर' के रूप में देखा जा रहा है। IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) और World Bank जैसी संस्थाएं भारत को वैश्विक मंदी के बीच एक चमकदार बिंदु मान रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत 6.5% से 7% की विकास दर बरकरार रखता है, तो वह न केवल घरेलू अर्थव्यवस्था को संभालेगा, बल्कि वैश्विक आर्थिक इंजन को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर भारत के पूंजीगत व्यय (Capex), राजकोषीय अनुशासन और ग्रीन एनर्जी पर केंद्रित है। Reuters और Bloomberg की हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेशी निवेशक भारत को चीन के विकल्प के रूप में देख रहे हैं। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में बजट में होने वाले आवंटन का सीधा असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ेगा।
प्रमुख देशों पर संभावित प्रभाव:
अमेरिका (USA): वॉल स्ट्रीट के निवेशक भारत को 'नेक्स्ट ग्रोथ इंजन' मान रहे हैं। यदि बजट में FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) के नियमों में और ढील दी जाती है, तो अमेरिकी पूंजी का बड़ा प्रवाह भारत की ओर मुड़ सकता है, जो वर्तमान में ऊंची ब्याज दरों से जूझ रहे अमेरिकी बाजार के लिए एक विकल्प बनेगा।
ब्रिटेन (UK): ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन के लिए भारत एक अनिवार्य पार्टनर है। बजट 2026 में India-UK FTA (मुक्त व्यापार समझौता) की दिशा में होने वाली प्रगति लंदन की कंपनियों को भारतीय सर्विस और आईटी सेक्टर में बड़े अवसर प्रदान कर सकती है।
वर्ल्ड बैंक के अनुसार, भारत का संतुलित बजट यह साबित करेगा कि लोकतांत्रिक और विकासशील राष्ट्र वैश्विक संकटों के बावजूद स्थिर रह सकते हैं। हालांकि, आईएमएफ ने तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों को लेकर सतर्क रहने की भी सलाह दी है। कुल मिलाकर, यह बजट केवल भारत का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक रोल मॉडल के रूप में सामने आने वाला है।