हिमाचल की सियासत में प्रोटोकॉल पर बवाल: कैबिनेट मंत्री यादविंद्र गोमा ने डीसी मंडी के खिलाफ पेश किया विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव



मंडी/शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है, जिसने ब्यूरोक्रेसी और सरकार के बीच तल्खी बढ़ा दी है। प्रदेश के आयुष, खेल एवं विधि मंत्री Yadvinder Goma ने मंडी के उपायुक्त (DC) अपूर्व देवगन के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को Privilege Motion (विशेषाधिकार हनन) का नोटिस सौंपा है। यह कदम हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कार्यविधि नियमावली के नियम-75 के तहत उठाया गया है। मामला गणतंत्र दिवस और पूर्ण राज्यत्व दिवस समारोहों के दौरान तय सरकारी प्रोटोकॉल के उल्लंघन से जुड़ा है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

मंत्री यादविंद्र गोमा का आरोप है कि जब वे 25 जनवरी को राज्यत्व दिवस समारोह में शामिल होने मंडी पहुँचे, तो प्रोटोकॉल के बावजूद DC Mandi न तो उनके स्वागत के लिए उपस्थित थे और न ही प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक समन्वय किया गया था। मंत्री ने इसे एक कैबिनेट मंत्री और संवैधानिक पद की गरिमा को जानबूझकर ठेस पहुँचाने वाला कृत्य करार दिया है। उन्होंने अपने नोटिस में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों के दौरान एक कैबिनेट मंत्री के आगमन पर जिला प्रशासन की अनुपस्थिति केवल 'लापरवाही' नहीं बल्कि 'प्रशासनिक उदासीनता' का गंभीर उदाहरण है।

विशेषाधिकार हनन के इस नोटिस में विधानसभा अध्यक्ष से मांग की गई है कि डीसी मंडी से इस संबंध में कड़ा स्पष्टीकरण तलब किया जाए। मंत्री ने तर्क दिया है कि इस तरह का व्यवहार विधायी संस्थाओं के सम्मान को कम करता है। अब गेंद विधानसभा अध्यक्ष के पाले में है, जो यह तय करेंगे कि इस मामले को विशेषाधिकार समिति (Privilege Committee) के पास भेजा जाए या नहीं। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो संबंधित अधिकारी को सदन की गरिमा के उल्लंघन के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।



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