भारत-अमेरिका के बीच 'दाल' बनी व्यापारिक रोड़ा: अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप को लिखा पत्र, भारत के टैरिफ पर जताई आपत्ति



वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक वार्ता (Trade Talks) में 'दाल' एक नया विवाद बनकर उभरी है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच लंबित ट्रेड डील एक बार फिर अटकती नजर आ रही है। हाल ही में अमेरिकी सीनेटरों मोंटाना से स्टीव डेंस और उत्तरी डकोटा से केविन क्रेमर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक कड़ा पत्र लिखकर भारत पर दबाव बनाने का आग्रह किया है। In the letter dated January 16, the senators urged President Trump to ensure that the 30% import duty imposed by India on American pulses, especially yellow peas, is removed to protect the interests of U.S. farmers. सांसदों का तर्क है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता है (लगभग 27%), लेकिन उच्च टैरिफ के कारण अमेरिकी उत्पादकों को भारतीय बाजार में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

यह विवाद तब और गहरा गया जब भारत ने अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ जिसमें रूसी तेल खरीद पर लगा दंड शुल्क भी शामिल है के जवाब में पिछले साल 30 अक्टूबर को अमेरिकी पीली दाल पर 30% आयात शुल्क लागू कर दिया था। Analysts view this move as a 'silent retaliation' by New Delhi against the aggressive trade policies of the Trump administration. अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति को सलाह दी है कि वे इस विषय पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करें ताकि दोनों देशों के बीच सहयोग का नया रास्ता खुले और अमेरिकी किसानों को उनका पुराना बाजार वापस मिल सके। पत्र में यह भी याद दिलाया गया है कि 2020 में भी इसी तरह की पहल की गई थी, जिससे तत्कालीन व्यापार वार्ता में लाभ मिला था।

हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो जैसे अधिकारियों की टिप्पणियां भारत में नाराजगी पैदा कर रही हैं। नवारो ने हाल ही में भारत की एआई (AI) नीतियों और व्यापारिक स्वायत्तता पर सवाल उठाए थे, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में कड़वाहट बढ़ी है। While both nations aim to finalise a multi-sector trade agreement, India remains firm on its 'red line' regarding agricultural protection for its domestic farmers. आगामी मंगलवार को होने वाली व्यापार वार्ता में दालों पर लगा यह टैरिफ एक प्रमुख एजेंडा होने की संभावना है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।


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