नई दिल्ली: प्रतिष्ठित जर्नल 'नेचर' में प्रकाशित एक वैश्विक अध्ययन ने भारत के लिए खतरे की बड़ी घंटी बजाई है। शोध के अनुसार, गंगा-ब्रह्मपुत्र, महानदी, ब्राह्मणी और गोदावरी जैसे प्रमुख नदी डेल्टा क्षेत्र समुद्र के बढ़ते जल स्तर से भी अधिक तेजी से डूब रहे हैं। Scientists have found that more than half of the world's large deltas are sinking at a rate exceeding 3 mm per year, with human activities like excessive groundwater extraction being the primary culprit. भारत में विशेष रूप से ब्राह्मणी (77%) और महानदी (69%) डेल्टा का अधिकांश हिस्सा तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे भविष्य में इन क्षेत्रों के समुद्र में समा जाने का जोखिम बढ़ गया है।
डेल्टा क्षेत्र दुनिया की केवल 1 प्रतिशत भूमि पर स्थित हैं, लेकिन यहाँ वैश्विक आबादी का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा रहता है, जो पूरी तरह कृषि, मछली पालन और व्यापार के लिए इन उपजाऊ मैदानों पर निर्भर है। समस्या की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के इन डेल्टाओं में रहने वाले लगभग 23 करोड़ लोग अब प्रत्यक्ष रूप से बाढ़ के जोखिम में हैं। The study highlights that the over-extraction of groundwater for agriculture and industry causes the soil beneath to compress, leading to land subsidence. इसके अलावा, नदियों पर बने बांधों के कारण गाद (Silt) का प्रवाह रुक गया है, जो प्राकृतिक रूप से डेल्टा की ऊंचाई बनाए रखने में मदद करती थी।
इस 'स्लो-मोशन' आपदा का सबसे बुरा असर कोलकाता, ढाका और बैंकॉक जैसे बड़े शहरों पर पड़ रहा है, जहाँ जमीन धंसने से बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँच रहा है और खेती योग्य भूमि में खारा पानी घुस रहा है। Researchers warn that many Indian deltas are 'unprepared' for this crisis due to limited economic and institutional resources compared to developed nations. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भूजल निकासी पर तत्काल नियंत्रण नहीं लगाया गया और मैंग्रोव जैसे प्राकृतिक सुरक्षा कवच को बहाल नहीं किया गया, तो आने वाले दशकों में बड़े पैमाने पर मानवीय विस्थापन और सामाजिक तनाव अपरिहार्य हो जाएगा।