नई दिल्ली: जहाँ वैश्विक स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ इंसानों की औसत लंबाई बढ़ रही है, वहीं भारत में स्थिति इसके ठीक उलट नजर आ रही है। हालिया शोध और लैंसेट (The Lancet Height Study) की रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में भारतीयों की औसत लंबाई में गिरावट दर्ज की गई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला है कि 15-25 वर्ष के पुरुषों की औसत लंबाई में लगभग 1.10 सेमी की कमी आई है। वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के लिए यह 'रिवर्स गियर' चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि आर्थिक प्रगति के बावजूद शारीरिक विकास का पैमाना नीचे गिर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे केवल जेनेटिक्स नहीं, बल्कि कुपोषण, खराब जीवनशैली और प्रदूषित वातावरण जैसे कई गंभीर कारण जिम्मेदार हैं।
बचपन का कुपोषण और 'स्टंटिंग'
डॉक्टरों के अनुसार, भारत में लंबाई घटने की सबसे बड़ी वजह बचपन में होने वाला कुपोषण है। NFHS-5 के मुताबिक, भारत में 5 साल से कम उम्र के 35 प्रतिशत बच्चे नाटे (Stunting) हैं। जेएनयू (JNU) की रिसर्च के अनुसार, भले ही किसी बच्चे के जींस उसे लंबा बनाने की क्षमता रखते हों, लेकिन यदि उसे शुरुआती वर्षों में सही पोषण नहीं मिलता, तो उसकी 'ग्रोथ प्लेट्स' अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुँच पातीं।
क्यों छोटे रह जा रहे हैं भारतीय बच्चे? विशेषज्ञों की राय:
अर्ली प्यूबर्टी (Early Puberty): डॉ. विक्रम बेल्लिअप्पा के अनुसार, जंक फूड और मोटापे के कारण बच्चों में हार्मोनल बदलाव समय से पहले हो रहे हैं। इससे 'ग्रोथ प्लेट्स' समय से पहले बंद हो जाती हैं और बच्चा अपनी संभावित लंबाई हासिल नहीं कर पाता।
नींद की कमी और मोबाइल: डॉ. जितेंद्र जैन बताते हैं कि 'ग्रोथ हार्मोन' सबसे ज्यादा गहरी नींद के दौरान रिलीज होते हैं। मोबाइल की ब्लू लाइट और देर रात तक जागने की आदत इस नेचुरल साइकिल को तोड़ रही है, जिससे विकास रुक जाता है।
एंटीबायोटिक्स और गंदा पानी: बार-बार होने वाले पेट के संक्रमण और भारी एंटीबायोटिक्स का सेवन शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण (Absorption) की क्षमता को कम कर देता है।
तनाव (Stress): पढ़ाई और प्रतियोगिता का बढ़ता मानसिक दबाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जो सीधे तौर पर ग्रोथ हार्मोन के दुश्मन की तरह काम करता है।
व्यायाम और पोषण का भ्रम
सेलेब्रिटी फिटनेस कोच समीर जौरा ने स्पष्ट किया कि भारी वजन उठाने (Heavy Lifting) से हाइट नहीं रुकती, बल्कि खराब 'पोश्चर' बच्चों को छोटा दिखाता है। आज के बच्चे झुककर (Hunching) चलते हैं, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी का स्वाभाविक खिंचाव कम हो जाता है। साथ ही, भारतीय आहार में प्रोटीन की भारी कमी और कार्बोहाइड्रेट की अधिकता हड्डियों और मांसपेशियों के विकास में सबसे बड़ी बाधा है।
एपिजेनेटिक्स (Epigenetics) के शोध बताते हैं कि यद्यपि प्रदूषण और खराब डाइट सीधे DNA नहीं बदलते, लेकिन वे जींस के काम करने के तरीके को प्रभावित कर रहे हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक खतरनाक संकेत है। संतुलित आहार, पर्याप्त खेलकूद और गहरी नींद ही इस 'बौनेपन' के खतरे से बचने का एकमात्र रास्ता है।