दिल्ली की प्यास बुझाएंगे यमुना के तीन विशाल बांध: केंद्र ने लखवार, रेणुकाजी और किशाऊ प्रोजेक्ट्स को दी हरी झंडी



लखनऊ/नई दिल्ली: दशकों से फाइलों में दबे यमुना और उसकी सहायक नदियों पर प्रस्तावित तीन बड़े बांध प्रोजेक्ट्स अब हकीकत बनने की राह पर हैं। केंद्र सरकार ने दिल्ली के गहराते जल संकट को जड़ से खत्म करने के लिए लखवार, रेणुकाजी और किशाऊ बांध परियोजनाओं (Lakhwar Renukaji Kishau Dam Projects) को पुनर्जीवित करने का बड़ा फैसला लिया है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और जल मंत्री प्रवेश वर्मा के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में इन परियोजनाओं को रफ्तार देने की रणनीति तैयार की गई। अधिकारियों का दावा है कि इन बांधों के पूर्ण होने के बाद राजधानी दिल्ली को अगले 25 वर्षों तक पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

यमुना बांध परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और लक्ष्य

राजधानी में पानी की वर्तमान स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है, जहाँ 1,113 MGD की मांग के मुकाबले केवल 900 MGD का ही उत्पादन हो पा रहा है। इस 200 MGD की कमी को दूर करने के लिए ये तीन बांध संजीवनी साबित होंगे। परियोजनाओं के पूर्ण होने पर दिल्ली को मिलने वाले पानी का ब्यौरा कुछ इस प्रकार है: रेणुकाजी परियोजना (हिमाचल प्रदेश) से 275 MGD, किशाऊ परियोजना (उत्तराखंड-हिमाचल सीमा) से 372 MGD और लखवार बांध (उत्तराखंड) से 135 MGD पानी उपलब्ध होगा। इन परियोजनाओं से न केवल जलापूर्ति बढ़ेगी, बल्कि यमुना नदी के पर्यावरणीय प्रवाह (E-Flow) में भी सुधार होगा, जिससे नदी की स्वच्छता और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी। The proactive involvement of the central government aims to resolve long-standing interstate disputes and funding hurdles that previously stalled these critical infrastructure projects.

इन परियोजनाओं का लाभ केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों को भी जल और 760 मेगावाट से अधिक जलविद्युत का लाभ मिलेगा। वर्तमान स्थिति के अनुसार, लखवार परियोजना का 12.6% कार्य पूर्ण हो चुका है और इसे 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि रेणुकाजी और किशाऊ परियोजनाओं के 2032-33 तक पूर्ण होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये बांध समय पर तैयार हो जाते हैं, तो यह यमुना पुनर्जीवन (Yamuna Rejuvenation Plan) की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम होगा। Ensuring sustainable water availability is a cornerstone of the national strategy for the National Capital Region's future growth.



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