ईरान में प्रदर्शनकारियों को अंतिम चेतावनी: सरकार ने दिया 72 घंटे का अल्टीमेटम, आत्मसमर्पण न करने पर सख्त कार्रवाई के संकेत


तेहरान: ईरान में पिछले साल के अंत से जारी भीषण जन-आक्रोश के बीच वहां की सरकार ने अब तक का सबसे कठोर रुख अपनाया है। ईरान के पुलिस प्रमुख अहमद-रेजा रादान ने प्रदर्शनकारियों को 'दंगाई' करार देते हुए तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने का अल्टीमेटम जारी किया है। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित संदेश में रादान ने कहा कि जो युवा "भ्रमित होकर" इन प्रदर्शनों का हिस्सा बने हैं, यदि वे समय सीमा के भीतर सरेंडर करते हैं तो उनके प्रति नरमी बरती जाएगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अल्टीमेटम की अवधि समाप्त होने के बाद कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बिना किसी हिचकिचाहट के बल प्रयोग किया जाएगा। The ultimatum marks a decisive shift towards a full-scale crackdown as the regime struggles to contain the most significant challenge to its authority in recent history.

यह अशांति शुरू में बढ़ती मुद्रास्फीति, बेरोजगारी और ईरानी मुद्रा के गिरते मूल्य के विरोध में शुरू हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने लगा है। ईरानी प्रशासन ने इन प्रदर्शनों को अमेरिका और इजरायल द्वारा प्रायोजित साजिश करार दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करने के नाम पर देश भर में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गई हैं और अंतरराष्ट्रीय कॉल्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे जमीनी हकीकत दुनिया के सामने आने में कठिनाई हो रही है। Tehran's decision to cut off communication channels is being viewed by experts as a strategy to suppress dissent away from the eyes of the international community.

मानवाधिकार संगठनों द्वारा जारी आंकड़े इस संघर्ष की भयावहता को बयां कर रहे हैं। 'ईरान ह्यूमन राइट्स' नामक एनजीओ का दावा है कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई में अब तक 3,428 प्रदर्शनकारी अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 20,000 के करीब हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने भी गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि ईरान मौत की सजा को विरोध दबाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल ईरान में करीब 1,500 लोगों को फांसी दी गई थी, जो इसे दुनिया में सबसे अधिक फांसी देने वाले देशों की सूची में दूसरे स्थान पर रखता है। The escalating violence and the high rate of judicial executions have sparked global condemnation, prompting calls for immediate intervention by international human rights bodies.


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