नई दिल्ली/काबुल: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक चीनी रेस्तरां पर हुए भीषण आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इस्लामिक स्टेट (IS) ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस हमले में एक चीनी नागरिक सहित कम से कम 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि आतंकी संगठन ने यह संख्या 25 के पार होने का दावा किया है। पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी मंशा जाहिर करते हुए आईएस ने ऑनलाइन पोस्ट के जरिए बताया कि चीन को निशाना बनाने का मुख्य कारण वहां के शिनजियांग प्रांत में 'उइगुर मुसलमानों' पर होने वाले कथित अत्याचार हैं। आतंकी संगठन ने चेतावनी दी है कि चीनियों को यह नुकसान उइगुरों के साथ किए जा रहे व्यवहार के प्रतिशोध के रूप में पहुंचाया गया है। The explicit targeting of Chinese nationals marks a significant shift in the militant group's strategic objectives, directly linking local terror acts to China's internal human rights controversies.
काबुल के शहर-ए-नाव जिले में स्थित यह रेस्तरां चीनी नागरिकों और व्यापारियों के बीच काफी लोकप्रिय था, जिसे एक अफगानी नागरिक और एक चीनी दंपत्ति द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका रेस्तरां के किचन क्षेत्र में हुआ, जिसके बाद चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। हालांकि तालिबान प्रशासन के गृह मंत्रालय ने अभी तक इसे औपचारिक रूप से 'आतंकी हमला' करार नहीं दिया है और जांच जारी होने की बात कही है, लेकिन इतालवी चैरिटी और स्थानीय सूत्रों का मानना है कि हताहतों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। The discrepancy in casualty figures between the Taliban administration and international observers highlights the complex security and information landscape in post-2021 Afghanistan.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामिक स्टेट का यह कबूलनामा चीन के लिए एक गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है, क्योंकि 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से चीन ने अफगानिस्तान में अपने आर्थिक निवेश और प्रोजेक्ट्स को जारी रखा है। जहां अधिकांश मुस्लिम देश उइगुर मुद्दे पर बीजिंग के खिलाफ चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं आईएस द्वारा इसे हमले का आधार बनाना क्षेत्र में कार्यरत चीनी इंजीनियरों और राजनयिकों के लिए भविष्य में बड़े खतरे का संकेत है। चीनी सरकारी मीडिया 'CCTV' ने भी इस हमले में अपने नागरिकों के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि की है। This development is likely to put immense pressure on the Taliban government to ensure the safety of foreign investors as China remains one of the few global powers maintaining a steady presence in Kabul.