जम्मू-कश्मीर में 'टेरर-क्लीनअप': आतंकी संबंधों के आरोप में 5 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त, लश्कर और हिजबुल के लिए कर रहे थे काम



जम्मू: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाली सरकार ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के साथ मिलीभगत और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पांच सरकारी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, वन और जल शक्ति विभाग के कर्मी शामिल हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, ये कर्मचारी अपनी सरकारी पहचान और संसाधनों का उपयोग आतंकवादियों को रसद पहुंचाने, हथियार छिपाने और सुरक्षा बलों की संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए कर रहे थे।

The investigation revealed deep-rooted links with organizations like Lashkar-e-Taiba (LeT) and Hizbul Mujahideen (HM). बर्खास्त कर्मचारियों में मोहम्मद इश्तियाक (शिक्षक) शामिल है, जो लश्कर कमांडर अबू खुबैब के सीधे संपर्क में था और जिसे 2022 में हथियारों की खेप के साथ गिरफ्तार किया गया था। वहीं, लैब टेक्नीशियन तारिक अहमद शाह और वन विभाग के फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट ने मिलकर एक वांछित आतंकवादी को सुरक्षित तरीके से पाकिस्तान भागने में मदद की थी। सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर का नाम तब सामने आया जब 2021 में उसके घर पर हुई मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए थे, जिन्हें उसने अपने घर में पनाह दी थी।

The most startling revelation concerned a Health Department driver, Mohammad Yousuf, who used his official vehicle to transport weapons, grenades, and terror funds across the valley. पुलिस ने जुलाई 2024 में उसके वाहन से ₹5 लाख नकद और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया था, जो उसके पाकिस्तानी हैंडलर बशीर अहमद भट के निर्देश पर सप्लाई किया जाना था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी तंत्र में छिपे ऐसे 'स्लीपर सेल्स' और राष्ट्र-विरोधियों के लिए कोई जगह नहीं है। इस कार्रवाई के बाद अन्य विभागों में भी कर्मचारियों के पूर्ववृत्त (Antecedents) की गहन जांच तेज कर दी गई है ताकि प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह पाक-साफ रखा जा सके।



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