बाबा महाकाल के दरबार में उमड़ी आस्था: मन्नत पूरी होने पर गुजरात के भक्त ने भेंट किया 2.35 किलो का चांदी का मुकुट



उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब गुजरात के जामनगर से आए एक श्रद्धालु ने बाबा महाकाल को सवा दो किलो से अधिक वजन का चांदी का मुकुट अर्पित किया। भक्त प्रदीप गुप्ता ने अपनी विशेष मन्नत पूरी होने की खुशी में 2 किलो 350 ग्राम वजनी यह सुंदर मुकुट भगवान को भेंट किया, जिस पर चंद्रमा की आकृति बनी हुई है। Pradeep Gupta, who participated in the sacred Bhasma Aarti, shared that his wind power project, which was expected to take six months, was miraculously completed in just three months with the blessings of Baba Mahakal. इसी आभार को प्रकट करने के लिए वे अपने पूरे दल के साथ उज्जैन पहुंचे और मंदिर के पुजारियों के माध्यम से यह दिव्य उपहार भगवान को समर्पित किया।

सोमवार तड़के होने वाली भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया और उन्हें यह नया चांदी का मुकुट पहनाया गया। मंदिर की परंपरा के अनुसार, भगवान का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से अभिषेक करने के बाद भांग और चंदन के लेप से भव्य श्रृंगार किया गया। The atmosphere inside the sanctum sanctorum was filled with the rhythmic beats of drums and the echoes of conch shells as the unique Bhasma Aarti was performed, symbolizing the cycle of life and death and Lord Shiva's eternal presence. श्रद्धालु प्रदीप गुप्ता ने बताया कि बाबा की कृपा से उनकी मनोकामना मात्र तीन महीने में पूरी हो गई, जिससे अभिभूत होकर उन्होंने यह भेंट अर्पित की है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक दक्षिणमुखी महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दर्शन मात्र से ही भक्तों के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं और उनकी मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं। Through out the year, millions of devotees from across the globe visit Ujjain to witness this divine ritual, believing that offering services or items to the deity brings protection and spiritual fulfillment. सोमवार का दिन होने के कारण मंदिर में भक्तों का भारी सैलाब उमड़ा था और मुकुट अर्पण के समय पूरा परिसर 'जय महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। मंदिर प्रबंधन समिति ने दानदाता भक्त का सम्मान किया और इस भेंट को मंदिर के खजाने में दर्ज किया।



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