नई दिल्ली: देवों के देव महादेव की आराधना का महापर्व महाशिवरात्रि इस वर्ष फरवरी के महीने में अत्यंत शुभ संयोगों के साथ आ रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान भोलेनाथ के भक्त विशेष अनुष्ठान और जलाभिषेक के माध्यम से उनकी कृपा प्राप्त करेंगे। ज्योतिष आचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री के मुताबिक, इस वर्ष महाशिवरात्रि पर व्यतिपात, अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का त्रिवेणी संगम बन रहा है, जो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना गया है।
महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को दोपहर 3:59 बजे से प्रारंभ हो रहा है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद शुद्ध जल, शहद, शक्कर, घी और गंगाजल से महादेव का अभिषेक करना विशेष फलदायी होता है। भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, आम के बौर और सफेद फूल अर्पित करते हुए 'ओम नमः शिवाय' का जाप करने से आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है। इस बार बने रहे व्यतिपात योग में साधना और दान का अनंत फल मिलेगा, जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग के कारण नया व्यापार, भूमि या स्वर्ण खरीदना अत्यंत शुभ रहेगा।
इस वर्ष चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। जो श्रद्धालु दिन-रात मिलाकर पूजा करना चाहते हैं, वे सुबह 6 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक प्रत्येक 6 घंटे के अंतराल पर चार प्रहर की पूजा कर सकते हैं। हालांकि, शास्त्रों में रात्रि कालीन चार प्रहर की पूजा को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। रात्रि पूजा का प्रथम प्रहर शाम 6 से 9 बजे, द्वितीय प्रहर रात 9 से 12 बजे, तृतीय प्रहर मध्यरात्रि 12 से 3 बजे और चतुर्थ प्रहर तड़के 3 से सुबह 6 बजे तक रहेगा। पूजा के समापन पर हवन, आरती और ब्राह्मण भोज के बाद पारण करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।