देवभूमि में आस्था की जीत: भारी बर्फीले तूफान के बीच 12 किमी पैदल चले देवता श्री चुंजवाला के देवलू, बालीचौकी में दिखा भक्ति का अनूठा संगम


मंडी/बालीचौकी: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से अटूट आस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने साबित कर दिया कि भक्ति के आगे प्रकृति की चुनौतियां भी बौनी पड़ जाती हैं। उपमंडल बालीचौकी में कड़ाके की ठंड और भीषण बर्फबारी के बीच आराध्य देवता श्री चुंजवाला की पालकी के साथ दर्जनों देवलू (श्रद्धालु) करीब 12 किलोमीटर का कठिन सफर पैदल तय कर गंतव्य तक पहुँचे। मंगलवार को जब पूरा इलाका बर्फीले तूफान की चपेट में था, तब देवता के प्रति समर्पण ने भक्तों के कदमों को डगमगाने नहीं दिया। The Spiritual Trek in Balichowki amid heavy snow showcases the profound cultural roots and unwavering faith of the local community in their deities.

यह पूरी यात्रा देवता श्री चुंजवाला को उनके मूल स्थान देवधार से शिवाड़ी ले जाने के लिए आयोजित की गई थी। दरअसल, शिवाड़ी में देवता के एक परम भक्त के घर पर एक निजी धार्मिक कार्यक्रम (देउली) का आयोजन था। देव आदेश का पालन करते हुए देवलू वाद्ययंत्रों की पारंपरिक धुनों पर नाचते-गाते हुए रवाना हुए। रास्ते में कई स्थानों पर एक फुट से अधिक बर्फ जमी हुई थी और बर्फीली हवाएं शरीर को सुन्न कर रही थीं, लेकिन देवलुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। The Devotion of Chunjwala Devta Followers enabled them to overcome life-threatening weather conditions to ensure the deity reached the religious ceremony on time.

हैरानी की बात यह रही कि जहां इस मौसम में आम जनजीवन पूरी तरह ठप पड़ा था और लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे, वहीं देवता की पालकी के साथ चल रहे श्रद्धालुओं को थकान तक महसूस नहीं हुई। देवलुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि देवधार से शिवाड़ी तक का रास्ता चुनौतियों से भरा था, लेकिन देव भक्ति की शक्ति ने उन्हें मौसम की मार का एहसास ही नहीं होने दिया। हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में देवी-देवताओं के प्रति यह समर्पण यहाँ की संस्कृति का अटूट हिस्सा है। This Remarkable Display of Faith in Devbhoomi highlights how traditional beliefs empower residents to withstand the harshest of Himalayan winters.


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